शनिवार, 30 जून 2012

शादी करते वक्त क्या देखे


 शादीशुदा और बाल-बच्चों वालों से विवाहयोग्य-अयोग्य लोग पूछा करते हैं, भैया जी! शादी के बारे में आपका क्या ख्याल है? शादी करनी चाहिए या नहीं? ये पूछताछ उन सर्वोत्कृष्ट औपचारिकताओं में होती है जो आदमी अपनी जिन्दगी में कर सकता है। क्योंकि ये प्रश्न अक्सर वो लोग करते हैं - जिनके मन में शादी के लड्डू फूट रहे होते हैं... जो इन भावनाओं के मजे ले रहे होते हैं और कहीं ना कहीं, नये रिश्ते का इंतजार भी कर रहे होते हैं... यानि ये प्राणी निश्चित ही शादी की तारीख तय कर चुके होते हैं। जिनको शादी से कोई मतलब नहीं, वो किसी तरह के प्रश्न क्यों करेगा ?

दरअसल शादीशुदा से यह प्रश्न करने का अर्थ ही समझ नहीं आता। क्योंकि यदि वह कहे कि ”नहीं करनी चाहिये“ तो यह उसका अनुभव है, और कहे कि ”करनी चाहिए“ तो यह भी उसका निजी अनुभव है.... आपके बारे में भविष्यवाणी कैसे की जा सकती है। आप किसी संबंध को शारीरिक, मानसिक रूप से कैसे निभाते है.. नहीं निभाते हैं यह आप पर निर्भर है ना कि किसी शादीशुदा पर। निजी जीवित संबंधों का सामान्यीकरण कैसे किया जा सकता है?

लेकिन इसके उत्तर के बारे में सोचते हुए याद आया कि - कहीं पढ़ा था ...
आप जिससे प्यार करते हो उससे शादी मत करो .... शादी उससे करो जो आपसे प्यार करता है।
ये वाक्य सरलता से समझ नहीं आता, पर जिन्दगी के सच ऐसे ही होते हैं।
पर मेरा मानना है शादी जीवन का वो सच है जिसके लिए दिल से नहीं दिमाग से फैसला करना चाहिए /
 शादी  जीवन  का   बहुत  बड़ा  फैसला  है ,ये  दो  इंसानों  को  ही  नहीं  उनके  परिवार  को  भी  जोड़ता  है . शादी  के  बाद बहुत  से  प्यारे  बंधन  हमे  मिलते  है  जिनको  आपसी  प्यार  और  समझ से  शादी  में  बंधे  दोनों  बन्दों  को  निभाना  होता  है .अगर  दोनों  में  प्यार  विशबास  और  समझ  है  तो  वो  हर प्रॉब्लम  को  आसानी से  हल  कर  लेंगे ,दोनों  के  दिल  में  अपने  बड़ो  के  लिए  सम्मान  होना  चहिये इसलिए  जीवन  का  ये  फैसला  सिर्फ  प्यार  पर  नहीं  इन्सान  की  परख  कर  करना  चहिये  .
             
 शादी  उससे  करो  जो  आपके  परिवार  को  इज्ज़त  प्यार  दे   जो  शादी  के  इस   पवित्र  बंधन  को  प्यार  दे ,जो  आपके  सुख  दुःख  में  हमेशा  आपका  साथ  दे ,जो  एक  नए  रिश्ते  को  सचाई  और  विशबास  के  साथ  आगे  बडाये , जो  आपके  अच्छे   सही  निर्णय  में  आपको प्रोत्साहित करे  पर  जब  आप  गलत  हो  तो  आपको  प्यार  और  सख्ती  के  साथ  सही  रास्ता  दिखाए  आपको  आपकी  गलती के  लिए  टोके  नाकि  आपकी  चापलूसी  करे .क्योकि  जहा   ऐसा  हुआ  वही   घर  के  और  लोगो  का  सम्मान  दाव पर  लग  जाता  है .शादी  का  मतलब  प्रेमी  पाना  नहीं  है ,शादी  का  मतलब  हमसफ़र , जीवनसाथी , वो  दोस्त  पाना  है  जो  आपको  समझे  और  आपके  कंधे  से  कन्धा  मिला  कर  साथ  चले .जो हर अच्छी बुरे वक्त हमारे साथ हो और एक मार्गदर्शक ,प्रेमी ,हमसफ़र का सच्चे दिल से फ़र्जे निभाए जिसके साथ हम खुद के सफल भबिष्य का सपना सजाये और उसको कर्यबंत भी करे /

रविवार, 24 जून 2012

मां शब्द का अर्थ


  माँ  शब्द के  अर्थ को हम क्या समझ पाएगे


माँ  शब्द के  अर्थ को हम क्या समझ पाएगे  ,
नौ महीनो के संघर्ष को कैसे शब्दों में पीरो पायेगे,
         
              माँ ममता का रूप ,ईश्वर का वरदान है ,
             हमारे हर सुख दुःख में हर पल हमारे साथ है ,
            जब दर्द का एहसास होता है माँ शब्द मरहम की तरह साथ होता है,
             खुशियों में भी माँ का साथ और आशीर्वाद जीने की राह देता है ,
             ये अनमोल रिश्ता हर कदम हर संघर्ष हमारे पास रहता है //

अगर हम दिल है तो माँ इस दिल की धड़कन है ,
अगर हम संगीत  है तो माँ उसका साज है ,
जीवन के हर संघर्ष में बिन स्वार्थ माँ ही हमारे साथ है ,
भगवान का रूप है माँ ममता की शान है,
हमारे इस जीवन की वही तो पहचान है,
माँ की ममता को समझना हमारे लिए ही नहीं ,
भगवन के लिए भी एक जटिल काम  है //

एक सपना


मेरा प्यारा सपना था एक साथी तेरे जैसा
मेरा प्यारा सपना था एक साथी तेरे जैसा,
जिसके आंगन को महकाए मेरी जीवन रेखा,
जिसके संग बीते खुशियों का मेरा हर एक लम्हा ,
हो जिसके संग प्यार भरा खुशियों का घरोंदा मेरा ,
 
              
   जीते हो जिसमे खुशियों के सब रंग हम प्यारे प्यारे ,
                     जिसमे हो खुशियों का आना जाना और गुनगुनाता बसेरा 
                    मेरा प्यारा सपना है एक प्यारा घरोंदा मेरा ,
                    जिसमे हो तेरा प्यार बसा और प्यारा साथ हमारा //            

मेरा प्यारा सपना था एक साथी तेरे जैसा,
जिसके आंगन को महकाए मेरी जीवन रेखा,
            
             दादी की प्यारी यादे हो और अशिर्वाद बड़ो का 
             जिसमे दादा की बाते हो पापा का समझाना 
             बहेन से वो तेरा उलझना मम्मी का डाट लगाना 
             मेरा देख के प्यार भरा घर धीरे से मुस्काना //

मेरा प्यारा सपना था एक साथी तेरे जैसा,
जिसके आंगन को महकाए मेरी जीवन रेखा,

              
               आँखों में प्यार हो मेरा..हाथो में हाथ हो मेरा.. ,
              तेरे जीवन के सुख दुःख में हरदम साथ हो मेरा ,
               तेरे जीवन में ले के आऊ खुशियों का एक खिलौना,
              हो वो बिल्कुल तेरे जैसा पर शैतानियो का परिन्दा 
              बच्चो की गुंजन से गुंजित हो प्यारा अँगना हमारा 
             खेलो जिसमे तुम उनके संग ऐसा हो प्यारा नज़ारा 

मेरा प्यारा सपना था एक साथी तेरे जैसा,
जिसके आंगन को महकाए मेरी जीवन रेखा,





सोमवार, 4 जून 2012

जीवन क्या है?

जीवन क्या है ...?
क्यों ?? क्यों ...कहता है जीवन क्या है ...?
कब तक तुझको ये बतलाऊ ....लाइफ हूँ  देखो ऐसी  हूँ ....!
       लोगो से परिचय दिलवाऊ फिर भी प्यार न तुझ से पाऊ ....!
       सोच अगर तू मुझ में जीता ,तेरी साँसे मुझ में बस्ती ........!
फिर तुझको में  न मानु ,तुझको अगर भुला देती हूँ ..........!
तेरा परिचय सबसे मांगू .....कौन है तू ....?आखिर है कौन तू ...........?
      आंसू कहता तुझको कोई ,दर्द भी कहता ,बोझ भी कहता 
      कभी दया करके तुझपे वो ,प्यार से कोई गीत सुनाता.....?
और चाहता तुझसे वो उस  गीत के संग थिरकना और फिर गुनगुनाना 
क्या ऐसा प्यार तुझे भाएगा ,क्या तू प्यार  फिर दे पायेगा ...???
              मेरी सांसे तुझमे बस्ती है ..तुम लोगो में जीती हूँ में .....!
              जब तक  तू जीती रहती है में भी जीवन कहलाती हूँ !!
             मुझे दुखी किया है तुने ...और उमीदे  भी  मुझ से है ...??
चाहा  नहीं मुझे जब तुने ,प्यार की आस में क्यों बैठा है ...?
प्यार दे में प्यार ही दूंगी ..खुशियों से दामन भर दूंगी ...
मत पूछ तू क्या जीवन है ...मेरा परिचय क्या है !
         क्यों ?? क्यों ...कहता है जीवन क्या है ...?
          कब तक तुझको ये बतलाऊ ....लाइफ हूँ  देखो ऐसी  हूँ ....!




           
               





रविवार, 3 जून 2012

नारी का अस्तित्व है

नारी  का  अस्तित्व  है  सागर की गहराई  सा 
 नदियों  जैसा समां गया रिश्तो का प्यार परछाई  सा //
भगवान का वरदान  है नारी ममता की शान है ,
जिसको दिया इश्बर  ने माँ बानने  का मान  है /
फिर क्यों तुम घबराते हो बेटी को ठुकराते हो ,
प्यार दो विश्बास दो बेटी को भी मान दो /
अपने जीवन में बेटी को एक सफल पहचान  दो ,
आज है नारी बनके उभरी  शक्ति का प्रतीक है /
नारी के अस्तित्व से ही जीवन का स्वरुप है,
नारी है जीवन की नीव नारी मील  का पत्थर है ,
हर मंजिल पर खुद को पहचान देती  नारी इतनी सक्षम है//
अपने हाथो खुद के घर की नीव को न तुम  हिलाओ /
नारी भूर्ण  हत्या कर  इसका अस्तित्व न अब मिटाओ ,
बेटी पा  कर  खुद को तुम अब गर्व का एहसास  कराओ /
 कन्या दान जैसे महादान से खुद को न वंचित करवाओ  ,
माना  बेटे  घर के चिराग है पर बेटी तो  दो घर की शान है ,
बेटी नहीं रहेगी तो फिर  चिराग कहा से लाओगे /
प्रकृति के विनाश में  तुम अनजाने ही योगदान कर  जाओगे ,
इस समाज के विकराल रूप का कारण  तुम ही  कहलाओगे //