मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

पिता की दृष्टि से बेटी की सफ़लता एक कहानी

पिछले साल एमबीए इन फाइनेंस करने के बाद बेटी की जाब एक एमएनसी में लगी तो सबको बहुत खुशी हुई। उसे फिलहाल सबकी तरह वर्क फ्राम होम मिला, यानि कि बच्चे घर से काम कर रहे हैं तो मां बाप को सुकून कि बच्चे के पास जाब है और वो नज़रों में सामने भी, लेकिन लोकेशन तो कभी ना कभी ज्वाइन करनी ही थी और अब वो वक्त भी आ गया।

पैंडमिक के बाद जैसे जैसे सब खुलता जा रहा है सब अपने अपने मोर्चे पर डटने को तैयार खड़े हैं कालेज वाले कालेज और जाब करने वाले अपनी लोकेशन के लिए तैयार हैं। ये सब पार्ट आफ वर्क है लेकिन असल दिक्कत तब आती है जब शहर दूर हो और मामला बेटी का हो, एक तरफ़ उसका सुनहरा भविष्य वेलकम को तैयार हो लेकिन उस वेलकम का इस्तक़बाल करने में कुछ मुश्किलें भी आड़े आ रही हों।
 
अनजान शहर में एक हर लिहाज़ से अच्छा ठिकाना ढूंढना भी एक पज़ल गेम है। एक सौ बीस घंटे की छुट्टी लेकर निकले कि सारे काम अड़तालिस घंटे में निबटा कर बाक़ी के बाहत्तर घंटे घूमेंगे पयर्टन का लुत्फ़ लेंगे लेकिन साठ घंटे निकल चुके थे लेकिन परफेक्ट ठिकाना नहीं मिल पाया था इसलिए हमारा घूमना किनारे हो गया क्योंकि दिमाग़ ने घूमना शुरू कर दिया था। 

बेटी के दूर शहर में बसने की वजह से इधर पत्नी की नम आंखें और उदास चेहरा, उधर घर में सन्नाटा हो जाने की वज़ह से माता जी का रूंधे गले से हमें डांट कर कहना "कि कोई नौकरी नहीं करानी है हमको, बेटे को भी बाहर पढ़ने भेज दिया और बेटी को भी इतनी दूर भेजने को तुम राज़ी कैसे हो गये तुम उसे लेकर वापस आ जाओ"। 

इन दोनों को उदास देखकर मेरा भी मन उदास हो उठा कि तभी ईश्वर की मेहर हुई और एक लिंक मिला जिसने पिन प्वाइंट पर काम किया। दरअसल मेरी एक सिस्टर श्वेता जो वहीं रहती है पर इत्तेफ़ाक़न कभी मिलना नहीं हुआ ये बात जब उस तक पहुंची तो वो और उसके पति ने तुरंत एक्शन में आते हुए खुद ही मुझे काल करके संपर्क किया और कहा "भईया आप परेशान मत हों हम लोग देखते हैं क्या बेस्ट हो सकता है, बाक़ी ईश्वर है", फिर उन्होंने अपनी पड़ोसी प्रीति से संपर्क किया जो रह तो इस वक्त हैदराबाद में रही हैं, पर फिलवक्त अपने फ्लैट के रेंट आऊट एग्रीमेंट के सिलसिले में इन दिनों आयी हुई थीं। प्रीति ने अपनी पहचान के कुछ लोगों और ब्रोकर से बात शेयर की। 

जो काम पिछले साठ घंटे से टेंशन दे रहा था वो अगले छह घंटे में मन मुताबिक सार्ट आउट होकर डन हो गया। हमने राहत की सांस ली और ईश्वर के साथ साथ सभी को, जिन्होंने भी इस काम को अपना समझकर हमें सपोर्ट किया उन सभी को धन्यवाद दिया ।
अब बारी थी माता जी पिता जी को समझाने की पर वो समझे कितना ये तो पता नहीं पर चेहरे पर उदासी पढ़ी जा सकती है।
इधर पत्नी तो पिछले एक महीने से जबसे टिकट बुक हुई है उसके आंसू बाहर ही रखे रहते हैं, मां आखिर मां होती है वो धीरे धीरे ही नार्मल मोड में आयेगी,जब उसको यकीन हो जाएगा कि वो बेटी जो अभी तक घर भर की गुड़िया बनी हुई थी अब बड़ी हो गई है और अपनी पहचान बनाते हुए वेल सेटेल्ड है और अपनी कामयाबी से जब बच्चे खुश होते हैं तो मां बाप दूर रहते हुए भी खुशी महसूस करते हैं।

हां इन सबके बीच मेरी ज़िम्मेदारी पिता होने के नाते काफ़ी बढ़ गई है यद्यपि दिल दिमाग़ मेरा भी उधर ही लगा हुआ है, पर जीवन में ये पड़ाव हर उस माता पिता के सामने आता है जो चाहते हैं उसके बच्चे अच्छी तालीम लेकर ऊंचा मक़ाम हासिल करें और अपने कैरियर की बुलंदियों को छुयें। 

बच्चों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना महसूस हो और हमारे पैरेंट्स और पत्नी भी प्रसन्न मुद्रा में रहें ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है। ईश्वर सब अच्छा करेंगे और उनकी मेहर सदा की तरह बनी रहेगी इस उम्मीद और विश्वास के साथ कि..…

ये सच है कि बिन हौसलों के ऊंची कोई उड़ान नहीं होती
लौट जायें गर परिंदे यूं ही बिन उड़े फिर कोई पहचान नहीं होती
जीतना है आसमां को तो पंख में हौसलों का दम भरना ही होगा
दिख रही हो सामने मंजिल अगर फिर कोई भी थकान नहीं होती।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

खुद पर विश्वास

सच है, विपत्ति जब आती है,

हमको अंदर तक झकझोर जाती हैं।

क्षण एक नही लगता हम धीरज खो देते है।

ईश्वर के इंसाफ को  तराजू में तोल लेते है।

 वक्त  हमको अंदर तक तोड़ देता है।

 सोच में नकारात्मक प्रभाव छोड़ देता है।

दुनिया के सामने दयनीय बन जाते है।

खुद ही बिना हारे हर  जंग हार जाते है।।

 काश हम फौजी जैसे सूरमा होते 

 एक  क्षण नहीं धीरज खोते,

काँटों में भी राह बना लेते 

विघ्नों को हर मोड़ पर हरा देते

 संघर्ष कर हर मोड़ पर 

सफलता को गले लगाते

हर कष्ट से खुद ही संभाल जाते।।

मानव जब जोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है।

 मेहनत कर जो संघर्ष के पसीने में 

खुद को नहीं जलाता है,

जीवन के सफर में सफलता की

रोशनी वह नहीं पा  पाता है।

गुन बड़े एक से एक प्रखर,

हैं छिपे मानव के भितर,

पर उजागर तभी होते है 

जब खुद की छमता पर इंसान विश्वास कर पाता है।।


मंगलवार, 25 जनवरी 2022

क्या सही है बच्चो के लिए अभिभावक बनना या फेर एक अच्छा दोस्त जिससे वो कुछ न छिपाए




में यहाँ अपना अनुभव आपके साथ बाटना चाहती हूँ जो में अपने कॉलेज के समय अपने साथ के और दोस्तों से अनुभव लिया और जो मेरी अभिभावक ने मुझे सिखाया मुझे लगता है की अगर आप और अपनी सारी पीडी के साथ अपना ये अनुभव बाटू तो शायद कुछ अच्छा जो में अपने बड़ो से सिखा आपको बाता पाऊ और हमारी पीडी के अभिभावक अपने बच्चो को सही मार्ग दर्शन दे सके /
मैने देखा है कई अभिभावक बच्चो पर अंकुश लगते है खास तौर पर लडकियों के लिए की लडको से दुरे रहो ,अकेले बाज़ार न जाओ पिक्चर देखने दोस्तों के साथ न जाओ इतनी अंकुश किसी भी बच्चे पर लगाना सही है आपको लगता है इससे बच्चा सही मार्ग पर रहेगा पर अफसोस आपकी ये सोच गलत है अपने बच्चो को सही गलत की पहचान कराइए उनको बताइए क्या उनके लिए सही है क्या गलत //
मेरी मम्मी ने मुझे कभी किसी बंधन में नहीं बांधा बल्कि घर के बड़ो ने जब मम्मी को बोला की इसको co-education में पड़ा रही हो वाहा आपको सही लग रहा है तो उन्होने बहुत अच्छा बताया मुझे ही नहीं मेरे बड़ो को भी की कभी चुम्बक को देखा है negative सीरा हमेशा positive सिरे को अपनी ओर आकर्षित करता है यही आकर्षण लड़के और लडकियों के बीच होता है जितना इस आकर्षण से बच्चो को बच्चओगा वो उतना ही उस ओर भागेगा इसलिए उनको सही रास्ता दिखाओ/उन्होने कहा बच्चो को उनकी limitation समझनी चाहिए उनको ये पहचान करना सिखाना चाहिए की उनके लिए क्या सही है क्या गलत उनको अपने फैसले लेना खुद आना चाहिए लडके हो या लड़की दोस्त बनाओ लेकिन अपनी मरियादा कभी न भूलो


अगर में दोनों तरह के बच्चो को दो हिस्सों में बाटु एक वो जो अंकुश में जीते है एक वो जिनके अभिभावक उनको सारी छुट देते है तो मुझे लगता है शायद आप खुद अच्छा से सोच पायेगे में क्या कहना चाहती हु और मुझे भी पता चलेगा की मेरी सोच कितनी सही है //

बच्चो पर अंकुश

1.मम्मी पापा से झूट बोल कर घुमने जाना
2 मम्मी पापा से झूट बोल कर पिक्चर जाना
3 अपनी छोटी बड़ी सब बाते बड़ो से छुपाना
4. 80% सर्वे रिपोर्ट बोलती है की जो बच्चे गर्ल स्कूल या बॉय स्कूल में पड़ते है कॉलेज में आते ही गर्ल फ्रेंड ,बॉय फ्रेंड जैसे रिश्ते ही नहीं बनाते कई बार बहेक भी जाते है क्योकि पंछी कैद से पहली आजाद होते है और प्यार भरी धोके की दुनिया में खो जाते है क्योकि दिल की बात किसी भी बड़े से नहीं बाटते इसलिए कई बार गलत फैसला कर जाते है कोई उन्हे सही मार्ग दिखाने वाला नहीं होता और चोट खा कर संभलते है/

किसी बंधन में नहीं बंधे बच्चे

1. मम्मी पापा से बोल कर घुमने जाना
2 मम्मी पापा से बोल कर पिक्चर जाना
3 अपनी छोटी बड़ी सब बाते बड़ो से खुल कर बताना
4 80% सर्वे रिपोर्ट बोलती है की जो बच्चे बंधन में नहीं जीते वो हर बात मम्मी पापा से शेयर करते है समय समय पैर आप उनको सही रास्ता दिखा सकते है और क्योकि वो co -education में पडे है तो उनका आकर्षण कम होता है वो लडको को भी फ्रेंड की तरह लेते है/
अब आप बताये क्या सही है बच्चो के लिए अभिभावक बनना या फेर एक अच्छा दोस्त जिससे वो कुछ न छिपाए / बच्चो पर अंकुश लगाना या उनको प्यार से सही रास्ता दिखाना ??????

वो मेरे दिल का आशियाना है

वो  मेरा प्यार मेरे दिल का आशियाना है 



वो मेरा प्यार मेरे  दिल का आशियाना है 
तेरे बिना भी तेरा साथ मुझको प्यारा है 
वो तेरा साथ जो सपना था मेरे जीवन का 
तेरी ख़ुशी के लिए उसको भूल जाना है  
वो मेरा प्यार मेरे दिल का आशियाना है  

दिल में अपने बसाया है उन ख्यालो को 
न कोई साथ है न कोई आशियाना है 
लबो पे मेरे न कोई भी अफ़साना है 
 वो तेरी यादे ही अब प्यार का ठिकाना है 
 वो मेरा प्यार मेरे दिल का आशियाना है 

कर जाते है शरारत थोड़े  शैतान है हम 
    कर बैठे है ये गलती क्योकि इंसान है हम 
 न लगाना बातो को हमारी दिल से 
           आप को तो पता है कितने नादान है हम……। 

आपके खयालो से दमन को बचा के देखा 
    दिल को और नज़र को भी आज़मा के देखा 
 मेंने  कुछ पल आपको भुलाके देखा है .
       वो मेरे प्यार मेरे  दिल का आशियाना है …। 

वो एक चेहरा हम हर कही तलाश करते है,
ज़िंदा तो है मगर ज़िन्दगी तलाश करते है,
 कोई क्यों भुल जाता है हमे अपना बना कर ,
 हम खुद में वो कमी तलाश करते है
           वो मेरा प्यार मेरे दिल का आशियाना है। .......