सच है, विपत्ति जब आती है,
हमको अंदर तक झकझोर जाती हैं।
क्षण एक नही लगता हम धीरज खो देते है।
ईश्वर के इंसाफ को तराजू में तोल लेते है।
वक्त हमको अंदर तक तोड़ देता है।
सोच में नकारात्मक प्रभाव छोड़ देता है।
दुनिया के सामने दयनीय बन जाते है।
खुद ही बिना हारे हर जंग हार जाते है।।
काश हम फौजी जैसे सूरमा होते
एक क्षण नहीं धीरज खोते,
काँटों में भी राह बना लेते
विघ्नों को हर मोड़ पर हरा देते
संघर्ष कर हर मोड़ पर
सफलता को गले लगाते
हर कष्ट से खुद ही संभाल जाते।।
मेहनत कर जो संघर्ष के पसीने में
खुद को नहीं जलाता है,
जीवन के सफर में सफलता की
रोशनी वह नहीं पा पाता है।
गुन बड़े एक से एक प्रखर,
हैं छिपे मानव के भितर,
पर उजागर तभी होते है
जब खुद की छमता पर इंसान विश्वास कर पाता है।।
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