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मंगलवार, 25 जनवरी 2022
क्या सही है बच्चो के लिए अभिभावक बनना या फेर एक अच्छा दोस्त जिससे वो कुछ न छिपाए
में यहाँ अपना अनुभव आपके साथ बाटना चाहती हूँ जो में अपने कॉलेज के समय अपने साथ के और दोस्तों से अनुभव लिया और जो मेरी अभिभावक ने मुझे सिखाया मुझे लगता है की अगर आप और अपनी सारी पीडी के साथ अपना ये अनुभव बाटू तो शायद कुछ अच्छा जो में अपने बड़ो से सिखा आपको बाता पाऊ और हमारी पीडी के अभिभावक अपने बच्चो को सही मार्ग दर्शन दे सके /
मैने देखा है कई अभिभावक बच्चो पर अंकुश लगते है खास तौर पर लडकियों के लिए की लडको से दुरे रहो ,अकेले बाज़ार न जाओ पिक्चर देखने दोस्तों के साथ न जाओ इतनी अंकुश किसी भी बच्चे पर लगाना सही है आपको लगता है इससे बच्चा सही मार्ग पर रहेगा पर अफसोस आपकी ये सोच गलत है अपने बच्चो को सही गलत की पहचान कराइए उनको बताइए क्या उनके लिए सही है क्या गलत //
मेरी मम्मी ने मुझे कभी किसी बंधन में नहीं बांधा बल्कि घर के बड़ो ने जब मम्मी को बोला की इसको co-education में पड़ा रही हो वाहा आपको सही लग रहा है तो उन्होने बहुत अच्छा बताया मुझे ही नहीं मेरे बड़ो को भी की कभी चुम्बक को देखा है negative सीरा हमेशा positive सिरे को अपनी ओर आकर्षित करता है यही आकर्षण लड़के और लडकियों के बीच होता है जितना इस आकर्षण से बच्चो को बच्चओगा वो उतना ही उस ओर भागेगा इसलिए उनको सही रास्ता दिखाओ/उन्होने कहा बच्चो को उनकी limitation समझनी चाहिए उनको ये पहचान करना सिखाना चाहिए की उनके लिए क्या सही है क्या गलत उनको अपने फैसले लेना खुद आना चाहिए लडके हो या लड़की दोस्त बनाओ लेकिन अपनी मरियादा कभी न भूलो
अगर में दोनों तरह के बच्चो को दो हिस्सों में बाटु एक वो जो अंकुश में जीते है एक वो जिनके अभिभावक उनको सारी छुट देते है तो मुझे लगता है शायद आप खुद अच्छा से सोच पायेगे में क्या कहना चाहती हु और मुझे भी पता चलेगा की मेरी सोच कितनी सही है //
बच्चो पर अंकुश
1.मम्मी पापा से झूट बोल कर घुमने जाना
2 मम्मी पापा से झूट बोल कर पिक्चर जाना
3 अपनी छोटी बड़ी सब बाते बड़ो से छुपाना
4. 80% सर्वे रिपोर्ट बोलती है की जो बच्चे गर्ल स्कूल या बॉय स्कूल में पड़ते है कॉलेज में आते ही गर्ल फ्रेंड ,बॉय फ्रेंड जैसे रिश्ते ही नहीं बनाते कई बार बहेक भी जाते है क्योकि पंछी कैद से पहली आजाद होते है और प्यार भरी धोके की दुनिया में खो जाते है क्योकि दिल की बात किसी भी बड़े से नहीं बाटते इसलिए कई बार गलत फैसला कर जाते है कोई उन्हे सही मार्ग दिखाने वाला नहीं होता और चोट खा कर संभलते है/
किसी बंधन में नहीं बंधे बच्चे
1. मम्मी पापा से बोल कर घुमने जाना
2 मम्मी पापा से बोल कर पिक्चर जाना
3 अपनी छोटी बड़ी सब बाते बड़ो से खुल कर बताना
4 80% सर्वे रिपोर्ट बोलती है की जो बच्चे बंधन में नहीं जीते वो हर बात मम्मी पापा से शेयर करते है समय समय पैर आप उनको सही रास्ता दिखा सकते है और क्योकि वो co -education में पडे है तो उनका आकर्षण कम होता है वो लडको को भी फ्रेंड की तरह लेते है/
अब आप बताये क्या सही है बच्चो के लिए अभिभावक बनना या फेर एक अच्छा दोस्त जिससे वो कुछ न छिपाए / बच्चो पर अंकुश लगाना या उनको प्यार से सही रास्ता दिखाना ??????
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बच्चों के अंदर जिज्ञासा प्रवत्ति सबसे बलवान होती है, जब बच्चे शिशु अवस्था मे होते है , सबसे ज्यादा प्रश्न वो करते है , अभिवावक उनके प्रश्नों से गदगद होते, हँसते है, लेकिन उनके प्रश्नों का उत्तर वे दे नही पाते या देते नही | वही शिशु जब किशोरावस्था में आता है, जब उसके प्रश्न जटिल हो जाते है , तब घर मे ही उनके किये प्रश्नों दबा दिया जाता है{ज्यादातर प्रश्न यौन संबंधों से होते है}, या उन्हें बुरा कहकर शान्त करा दिया जाता है ! और यहीं से शुरुआत होती जेंडर बाइस की उस किशोर या किशोरी की सही ,गलत की पहचान की यात्रा | माता पिता और अन्य सभी का यह उत्तरदायित्व है बच्चो को उनकी जिज्ञासा, उनके प्रश्नों का सही निवारण करे तो सही ,गलत में भेद कर सकते है |
जवाब देंहटाएंआप ने सही कहा बच्चो के प्रश्न जटिल हो जाते है उनका सही प्रकार से समझना बहुत जरूरी है जो मां बाप को चाहिए कि बच्चो को समझाए। अपने बोला ज्यादातर प्रश्न यौन संबंधित होते है तो सरकार ने खुद बच्चो को इसकी शिक्षा देने के लिए हाईस्कूल से इंटर तक एक क्लास मोस्टली सब स्कूल में स्टार्ट करी है।इसके इलावा माता पिता लड़की को उसकी मां और लड़के को उसके पिता भी समय समय पर सही गलत के बारे में बताना चाहिए और एक दोस्त बन ये काम अच्छे से किया जा सकता है जिससे बच्चे गलत रास्ते पर न जाए
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