शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

बदलेगा मेरे दोस्त बहुत जल्द ये जमाना

 बदलेगा  मेरे  दोस्त  बहुत  जल्द  ये  जमाना ,

क्योकि  किसी  ने  सही  कहा है 
,
वक़्त  और  मौसम  कभी  किसी  के  लिए  नहीं  ठेरता  ,

जब  अंधकार  गहरा  हो  जाये  तभी  समझो  

सुबह  लालिमा  बन  बहुत  जल्द  छा जाये  ,

बदलेगा  मेरे  दोस्त  ये  जमाना  क्योकि

 वक़्त वो  पहिया है जो  कभी  एक  पथ  पर नहीं  रुक  पाया .

वक़्त  के सामने भगवन भी कहा रुक पाए 

तभी तो कान्हा जशोदा को छोड कर्म पथ पर आगे बड़े आये,

इस वक़्त  रूपी पहिये ने कंस के अहंकार को भी हराया 

सब जानते समझते माया से  कंस ने खुद को कितना बचाया ,

पर वक़्त का पहिय घूमता रहा घूमता रहा ,

तकदीर के लिखे फैसले से कंस खुद को कहा बचा पाया ,

बदलेगा  मेरे  दोस्त  बहुत  जल्द  ये  जमाना ,

वक़्त वो  पहिया है जो  कभी  एक  पथ  पर नहीं  रुक  पाया . 

हम लाख जतन कर ले वक़्त को नहीं रोक पायेगे 

वक़्त रूपी पहियों के बीच जीवन रूपी गाढ़ी बन सदा ऐसे ही चलते जायेगे

Mein Ek lekhika

में एक लेखिका जीवन के हर रंग से रंगती शब्दों का ये जाल ,
जज्बातों की माला को शब्दों में पिरोना है बस मेरा शौक,
मेरी हर माला में होता है जीवन का  कुछ राज,
कही  सुखो का सागर इसमें कही गम का एहेसास ,
कभी चेहरे पर लहलाती सी मुस्कान दे जाये,
कभी नयन की चंचलता दे मंद मंद मुस्काए
कभी शब्दों का लेखा कुछ गहराई से कह जाये
कभी बन सागर का पानी नैनो से बह जाये
में एक लेखिका जीवन के हर रंग से रंगती शब्दों का ये जाल ,
मेरे हर शब्दों में होता जीवन का एहेसास
कभी लिखु में चंचलता सी शोक परी की कहानी,
कभी लिखु में जूझते नवयुवको की रवानी
कभी नव शब्दों की माला में बुनती प्यार का रंग भी ऐसे
जैसे गागर भर डाली हो मधु रस से मैंने
कभी बिरहा की अग्नि में मैं युगल जोड़ी को रुलाऊ
कभी लक्ष्मी बन किसी का आंगन  पायल से खान्काऊ
में एक लेखिका जीवन के हर रंग से रंगती शब्दों का ये जाल ,
जज्बातों की माला को शब्दों में पिरोना है बस मेरा शौक,

 




मंगलवार, 8 नवंबर 2011

mummy to jeevan ka sabse sunder ashirwade hoti hai, kabhi dost kabhi teacher kabhi humari bodyguard bhi hoti hai. hum bhagwan ko nahi dekh sakte wahi to humare liye representative of god hoti hai........

   क्यों  की  माँ  तोह  माँ  होती  है  न ...............
हमारी  देखभाल  के  लिए  भगवान  ने बड़े  ही  प्यार  से  एक   प्यारी  चीज़  बनायीं  है /
जब  भी  आंसू  आये  आँखों  में  मेरी ,
उन्हें  पूंछने  सबसे  आगे  माँ  ही  आई  है ,
हमारे  गम  में  वोह  आज  भी  रोती  है  न ,
क्यों  की  माँ  तोह  माँ  होती  है  न ...

धुप  में  चलती   तोह  आँचल  से  छाँव  करती ,
मुझे  छाँव  देकर  वोह  खुद  धुप  में  जलती .
प्यार  करती  है  वो  हमे  बेपनाह ,
सूरत  उनकी   कितनी  भोली  भाली  होती  है  न .
हमारे  गम  में  वोह  आज  भी  रोती  है  न ,
क्यों  की  माँ  तोह  माँ  होती  है  न ...

हर  पल  हमे  उसने  ख़ुशी  और  सुख  दिया ,
बदले  में  हमसे  आंसुओं  के  सिवा  कुछ  न  लिया .
दुःख  दिए  है  हमने  उन्हें  कितने  ही ,
वोह  उन्हें  भी  तोह  चुप  चाप   सहती  है  न .
हमारे  गम  में  वह  आज  भी  रोती  है  न ,
क्यों  की  माँ  तोह  माँ  होती  है  न ...

माँ  के  बिना  जिंदगी  वीरान  होती  है ...
.
और  हमारी  हर  राह  सुनसान  होती  है ...
.
हमारे  सर  पर  माँ  का  हाथ  होना  जरुरी  है ...

.
क्यों  के  माँ  की  दुआओं  से  हर  मुश्किल आसान  होती  है ...


Ek shabd jo humare jeevan ko ek phechan deta hai,jiske shabd mein hi mamta rupi amrit hai "MA"

नये ज़माने के रंग में पुरानी सी लगती है जो,
आगे बढने वालों के बीच, पिछङी सी लगती है ,
जो गिर जाने पर मेरे, दर्द से सिहर जाती है ,
जो चश्मे के पीछे आँखें गढाए हर चेहरे में मुझे निहारती है,
जो खिङकी के पीछे टकटकी लगाए मेरा इन्तजार करती है,
जो... सुई में धागा डालने के लिये हर बार मेरी मनुहार करती है ,
जो तवे से उतरे हुए गरम फुल्कों में जाने कितना स्वाद भर देती है,
  वो मेरी माँ, हाँ मेरी माँ ही तो है वो//

आज भी कही संघर्ष है नारी का अस्तित्व

आज भी जब हम २०११ में कदम रख चुके है खुद को मोर्डेन कहते है गर्व के साथ क्या सच हम मोर्डन है या जो सोच हम रखते है वो हमारे मोर्डेन शब्द को पूर्ण रूप से अर्थपूर्ण बना रही है./ शायद नहीं
हम खुद को मोर्डेन  कहते है पर हमारी सोच आज भी हमको पिछड़ा हुआ बनती है केवल वेस्टर्न ड्रेस , खाने का वेस्टर्न तरीका जैसे की पिज्जा खाना ,continantal भोजन खाना हमको आधुनिक नहीं बनती/
  • आज भी हमारे देश में लडकियों को वही सब झेलना होता है जो आज से कई साल पहेले होता था/आज भी ६० % लोग लडकियों का होना अभिशाप के रूप में लेते है आज भी  लड़की  भूर्ण को जनम लेने से पहेले मार दिया जाता है इसका जीता जागता सबूत हमको आकड़ो से मिलता है जाहा आज  की जनसँख्या  108,०००लड़के  है वही लडकियों की संख्या  100,000 है जो की बहुत ख़राब अनुपात है,क्या  अब आप कह  सकेगे की हम मोर्डन है ?
  • आज भी जब लड़किया घर से निकलती है तो वही परेशानियों का सामना करती है जो आज से कई साल पहले करती थी जब हमारे यहाँ के पुरुष ज्यादा पड़े लिखे नहीं होते थे उनके लिए नारी सिर्फ घर का काम करने और वारिस को  जनम देने का एक जरिया थी उनका अस्तित्व पुरुष प्रधान समाज के लिए कोई मायने नहीं रखता था किन्तु आज जब नारी ने अपना अस्तित्व सिद्ध किया है पुरुष को हर जगह कंधे से कन्धा मिला कर साथ चलती  मिलती है /
        फिर भी यही  लड़किया अपने समाज में सुरक्षित नहीं जाहा देखो  आपको लड़के इन पर फ़ब्तिया कसते, गन्दी मजाक करते दिख जायेगे अपनी बहेनो के लिए जो लड़के किसी भी प्रकार का अपमान नहीं सहेगा वही दुसरे की बहनों का अपमान करते नहीं चुकेगा /शाएद यही एक विडंबना भी है की आज भी माँ बाप अपने घर बेटियों  को बाहर भेजने से डरते है उनकी शिक्षा कई बार रोके देते है या जल्द से जल्द उनकी इच्छा का ध्यान करे बगहर  उनकी शादी कर  देते है /काश हमारे देश के नौजवान लडकियों की इस परेशानी को समझते और अपने व्यबहार में कुछ सुधार ला पाते तो शायेद हम कह सकते की कुछ हम मोर्डेन हुए  है पर अफ़सोस हम सिर्फ कहने के लिए ही मोर्डेन हुए है/



































Kabhi sochti hu mein ki kya hai zindagi.

kabhi sochti hu mein kya hai zindagi,
Kisi ki khushiyo ka gharonda hai zindagi,
Ya kisi ke gamo ka karwa hai zindagi,
Ya zindagi bhi ek pani sa roop hai,
Jise roop mein jiye hum waisi hai zindagi,
Kabhi sochti hu mein kya hai zindagi,
Do log jo alag hai na mile hai kabhi,
fir sath fero mein hai takat ye kaun si
Ki hum kadam banaye,khushiyo ko jode de
Jo kal talak paraye tha,hai aaj sab wahi,
Kabhi sochti hu mein ki kya hai zindagi.
Kisi ko khone ka name hai zindagi,
Ya kisi ko pane ka ehesas hai zindagi,
Bas itna hi samajhe aya hai ab mujhe,
Waqut ke phaiyo per chalti
Ehesas ki gadi hai zindagi,
Jo dil mein hai hamare
wo waqut ke rhate juba par aye jaye
To armano ka kafila hai zindagi,
Jo dil mein rha gaya aur waqut nikal gaya
To dard bhare kafan ka karwa hai zindagi,

Kabhi sochti hu mein ki kya hai zindagi,bas ye samajh mein aya waqut aur halat ka saya hai zindagi

बड़ते रहना ही ज़िन्दगी है


समुंदर  की  गहरइयो  से  उठकर ,

एक  लहर  आगे  बड़ रही  थी ,
जाने  कितनी  उमंगे  कितना  जोश  लिए ,
हर बार  उठना गिरना ,और  गिर  कर फिर से  उठना ,
न  जाने  कितनी  ही  छोटी  छोटी  लहरों  को  अपने  अंदर  समाये  हुए,
वो  लहर  आगे  बड़  रही  थी ,

हर  बार  वही  चंचलता  वही  जोश ,
हर  लहर  में  वही  ख़ुशी  की  आवाजे  थी ,
आगे  बड़ते  जाना  और  साथ  साथ  चलते  हुए  ,
एक  अनदेखे  किनारे  को  पाने  की  उमंग  थी न  जाने  कितने  ही  सपने  सजोये  हुए
वो  लहर  आगे  बड़   रही  थी

हवा  का  रुख  साथ  था  और ,ऊपर  खुला  साफ़   आकाश  था ,
पर  शायद   सब  कुछ  इतना  आसान नहीं  था ,
आगे  एक  चटान थी  ,लहर  फिर भी  आगे  बदती  गयी  ,
एक  तेज़   आवाज  बहुत  से  बूंदे  उड़ये,
लहर  दो  अलग  अलग  हिस्सों  में  बट गयी
एक  चटान  के   इस   किनारे  दूसरी  चटान   के  उस  किनारे

अब  रफ़्तार  कम  थी  लहर  कम   उठ  रही  थी शायद   साथ  छुटने  का  गम  था ,
लेकिन  लहर  आगे  बड़   रही  थी 
विश्वास  पक्का  हो  तो  इरादे  सफल  हो  जाते  है
जो  छुट जाये  वो  फिर  मिल  जाते  है
लहर  को  भी  पूरा   विश्वास था
रास्ता  मुश्किल  था ,मगर  हौसला  साथ  था

चटान  का  फिर  दूसरा  किनारा  आ  पहुचा,
एक  बार  फिर  कुछ  आवाजे  आयी,
पर  इस  बार  बात अलग  थी ,
दोनों  लहरें  फिर मिल  गयी  ,
साथ  में  बहुत  सी  नयी   लहरें  भी  जुड़  गयी थी

मानो जशन मानाने  आयी  थी ,
फिर एक  वही  साथ  था ,
वही  ख़ुशी  वही  उमंगो  का  आसमाँ था
वही  हंसी  और  अब  आज  अभी   फिर  से  वो  लहर  आगे  बड़  चली .