मंगलवार, 8 नवंबर 2011

आज भी कही संघर्ष है नारी का अस्तित्व

आज भी जब हम २०११ में कदम रख चुके है खुद को मोर्डेन कहते है गर्व के साथ क्या सच हम मोर्डन है या जो सोच हम रखते है वो हमारे मोर्डेन शब्द को पूर्ण रूप से अर्थपूर्ण बना रही है./ शायद नहीं
हम खुद को मोर्डेन  कहते है पर हमारी सोच आज भी हमको पिछड़ा हुआ बनती है केवल वेस्टर्न ड्रेस , खाने का वेस्टर्न तरीका जैसे की पिज्जा खाना ,continantal भोजन खाना हमको आधुनिक नहीं बनती/
  • आज भी हमारे देश में लडकियों को वही सब झेलना होता है जो आज से कई साल पहेले होता था/आज भी ६० % लोग लडकियों का होना अभिशाप के रूप में लेते है आज भी  लड़की  भूर्ण को जनम लेने से पहेले मार दिया जाता है इसका जीता जागता सबूत हमको आकड़ो से मिलता है जाहा आज  की जनसँख्या  108,०००लड़के  है वही लडकियों की संख्या  100,000 है जो की बहुत ख़राब अनुपात है,क्या  अब आप कह  सकेगे की हम मोर्डन है ?
  • आज भी जब लड़किया घर से निकलती है तो वही परेशानियों का सामना करती है जो आज से कई साल पहले करती थी जब हमारे यहाँ के पुरुष ज्यादा पड़े लिखे नहीं होते थे उनके लिए नारी सिर्फ घर का काम करने और वारिस को  जनम देने का एक जरिया थी उनका अस्तित्व पुरुष प्रधान समाज के लिए कोई मायने नहीं रखता था किन्तु आज जब नारी ने अपना अस्तित्व सिद्ध किया है पुरुष को हर जगह कंधे से कन्धा मिला कर साथ चलती  मिलती है /
        फिर भी यही  लड़किया अपने समाज में सुरक्षित नहीं जाहा देखो  आपको लड़के इन पर फ़ब्तिया कसते, गन्दी मजाक करते दिख जायेगे अपनी बहेनो के लिए जो लड़के किसी भी प्रकार का अपमान नहीं सहेगा वही दुसरे की बहनों का अपमान करते नहीं चुकेगा /शाएद यही एक विडंबना भी है की आज भी माँ बाप अपने घर बेटियों  को बाहर भेजने से डरते है उनकी शिक्षा कई बार रोके देते है या जल्द से जल्द उनकी इच्छा का ध्यान करे बगहर  उनकी शादी कर  देते है /काश हमारे देश के नौजवान लडकियों की इस परेशानी को समझते और अपने व्यबहार में कुछ सुधार ला पाते तो शायेद हम कह सकते की कुछ हम मोर्डेन हुए  है पर अफ़सोस हम सिर्फ कहने के लिए ही मोर्डेन हुए है/



































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