शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

याद आ रही है पुरानी वो बच्चपन की यादे



याद आ रही है पुरानी वो बच्चपन की यादे


याद आ रही है पुरानी वो बच्चपन की यादे ,
वो बचपन के दिन ,वो नटखट सी बाते ,

वो पेड़ो पर चड़ना ,वो पउपा पकड़ना , 

वो तितली के पीछे भागते ही जाना
स्कूल में शेतानियो की नानी कहलाना

वो teacher का चट्रिंग बॉक्स बुलाना

याद आ रही है मीठी सी बातें ,

वो चमकीले दिन ,वो प्यारी सी बातें, 

वो प्रिसिपल का हर शेतानी पर
सबसे पहले मुझे याद करना
वो मम्मी का कहना
आज मार कर ही खाना खाऊगी
वो पापा का मासूमियत से समझाना
की बेटा पिट लो मम्मी खाना खा लेगी
वो बच्चपन की बाते वो भैया से लड़ना
बहुत याद आता है बच्चपन वो अपना 


याद आ गया वो चंचल सा बचपन, 

वो छिपना छिपाना,वो मिल बाँट कर टिफिन का खाना ,

वो लड़ना झगड़ना और वो डर कर सहमना I
शेतानी करना और सीधे बन जाना
teacher का कहना मेरी आँखों के सामने ही रहना
वो पैरोडी बनाना ग्रुप में सुनना


कितना प्यारा था बचपन हमारा ,

काश लौट आये वो बीता जमाना

आज भी आती है मुस्कान सबको
जब याद आता है बच्चपन हमारा
वो बच्चपन हमारा वो बच्चपन हमारा

शनिवार, 8 सितंबर 2012

जीना सिखाया मुझको मेरी आंखो ने






          जीना सिखाया मुझको मेरी इन प्यारी आँखों ने 


इक रिश्ता बनाया इन आँखों ने

मुझे दिल तक पहुचाया इन आँखों ने

किसी को चाहना किसे कहते है
ये भी सिखलाया इन आँखों ने

है शर्म हया का गहना ये

पलकों से बताया आँखों ने

कुछ राज छुपाये आँखों ने

हमे प्यार सिखाया आँखों ने

मैं याद करूँ उन सपनों को जिन्हें दिल में बसाया आँखों ने

मैं याद करूँ उन सपनों को जिन्हें सच कर दिखाया इन आँखों ने

होंठ तो अब तक हिले न थे हाथ हाथ से मिले न थे

चुपके से सब समझाया इन आँखों ने

धड़कन के साज़ बस बजे ही थे

साँसों की लय संग रचे ही थे

प्यार का सुन्दर गीत बनाया इन आँखों ने

इन आँखों का अब क्या कहना बस
इनमे दिल के है राज बसे

जो है अनजान सभी जन से

इन आँखों में वो ख्वाब सजे जो पूरा करदे साईं अगर

जीवन मेरा हो जाये सफल बस इतना ही में कहती हूँ

जीना सिखाया मुझको मेरी इन प्यारी आँखों ने .




ankhe

गुरुवार, 6 सितंबर 2012

बच्चो के बिगड़ने में उत्तरदायी कौन?

आजकल बच्चे बिगड रहे हैं,परन्तु इसके लिए उत्तरदायी कौन है ?
वर्तमान युग में यदि ये कहा जाय कि हम अपने परिवार ,समाज और देश का भविष्य ही अंधकारमय बना रहे हैं ,तो प्रथम दृष्टया उस पर विश्वास नहीं करेंगें ,परन्तु आज का यथार्थ यही है.ऐसा कहने के पीछे मेरी धारणा यह है कि बच्चे हमारा कल हैं,उन्ही पर हमारा ,परिवार ,समाज और राष्ट्र का भविष्य टिका है,परन्तु आज हम उनका उज्जवल भविष्य उनको भौतिक रूप से समृद्ध और कमाऊ संतान के रूप में ही निर्धारित करना चाहते हैं. अधिकांश परिवारों में आज क्या स्थिति है, देखते हैं……………
हम किसी परिचित परिवार में बैठे थे,टी वी पर कोई कार्यक्रम आ रहा था जिसका आनन्द सभी लोग ले रहे थे,इतनी देर में उनका छोटा बच्चा जिसकी आयु लगभग 10-11 वर्ष थी,आया रिमोट उठाया और तुरंत चैनल बदल दिया .बच्चे के बाबा ने कुछ अनिच्छा प्रकट की क्योंकि वो कोई पारिवारिक कार्यक्रम था . इसी समय बच्चे के पिता ने बड़े गर्व से कहा ,सुनता ही नहीं ,इसके सामने कोई और टी वी देख ही नहीं सकता.थोडा सा बज़ट का प्रबंध हो जाय ,हम तो सोच रहे हैं इसके कमरे में एक टी वी अलग ही लगवा दें,परन्तु इसका कहना है कि इसको एल ई डी ही चाहिए ,अब उसके लिए तो और प्रबंध करना होगा.मैंने उनसे कहा अभी तो छोटा है अलग टी वी कुछ जरूरी नहीं ,परन्तु बच्चे की माँ तुरंत बोलीं “नहीं जी, आजकल तो इनसे भी छोटे छोटे बच्चों के कमरे में अलग टी वी ,कंप्यूटर आदि सब कुछ रहता है ,ये बहुत दिन से जिद्द कर रहा है,अब तो लगवाना ही पड़ेगा.”बच्चों के मन में ये बात आ जाती है कि हमारे मम्मी पापा हमें प्यार नहीं करते.”
सुझाव वहाँ देना चाहिए,जहाँ उसकी उपयोगिता हो ,या कोई सुनने की इच्छा रखता हो , यही सोचते हुए हम लोग थोड़ी देर बैठकर अपने घर आ गए.मन ही मन मैं सोच रही थी एक मध्यम वर्गीय परिवार जो अपने लिए भले ही आवश्यकता या सुख सुविधा की वस्तुएँ जुटाने में वर्षों बिता दे परन्तु बच्चे को समस्त भौतिक सुख सुविधा अपनी चादर से पैर बाहर निकल कर भी देना चाहता है,परन्तु क्या ये उचित है? आज अपवाद स्वरूप कुछ परिवारों को छोड़ दें तो व्यवहारिक स्थिति यही है.
एक ओर तो कहा जाता है ,आजकल बच्चे बिगड रहे हैं ,स्वार्थ बढ़ रहा है उनमें ,सुनते नहीं ,बड़ों का सम्मान नहीं करते ,संस्कार टूट रहे हैं,बच्चों के खर्चे बढ़ रहे हैं आदि …………….परन्तु इसके लिए उत्तरदायी कौन है ?

दिखावे के प्रयास में अपनी जड़ों को छोड़ते हुए कुछ अधिक ही आगे बढ़ गए हैं.यही कारण है कि आज हम खुलेपन का समर्थन करते हुए बच्चों के सामने झूठ सच,नैतिक अनैतिक सभी तरह का व्यवहार करते हैं,अश्लील फ़िल्में,धारावाहिक ,अन्य कार्यक्रम बच्चों को दिखाते हैं जहाँ से बच्चे का अपरिपक्व मस्तिष्क सकारात्मक नहीं केवल नकारात्मक ही सीखता है.आज बच्चे हिंसक हो रहे हैं,गाली गलौज की भाषा का प्रयोग करते हैं ,हम उन को रोकते नहीं क्योंकि अब वो ही हमारी दृष्टि में आधुनिकता की पहिचान है. बच्चे को लालच अंकल चिप्स ,कोल्ड ड्रिंक,चौकलेट और पिज्जा का दिया जाता है,ये जानते हुए भी कि हम बच्चे के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. दूसरे शब्दों में बच्चे के मुख से निकली उचित अनुचित सभी मांगों को पूर्ण करना ! ऐसा लगता है कि हम भी तुष्टिकरण की नीति को अपनाने के आदि हो रहे हैं.आज बच्चे को पैसे का मूल्य समझने ही नहीं दिया जाता.एक या डेढ़ वर्ष की बच्ची को टी वी के आगे बैठाकर ,माँ बड़े गर्व से कहती हैं ,टी वी बंद नहीं करने देती ,रोती है यदि बंद करें तो .
पहले भी बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी मांगें पूर्ण की जाती थी,लालच दिया जाता था,परन्तु कहानी सुनाना,घुमा कर लाना,बच्चों की गुल्लक में पैसे डालना ,उनको उनकी रूचि का कोई खिलौना अपनी जेब के अनुसार दिलाना,उनकी रूचि के व्यंजन बनाकर खिलाना आदि आदि ..
मेरा मानना है कि बच्चों की मांग पूर्ण अवश्य की जाएँ परन्तु एक सीमा तक ,बच्चों को अपनी परिस्थिति बताकर कुछ समझ को विकसित करने का कार्य किया जाय..आज की माँ परेशान हो कर ये तो कहती हैं कि हमारा बच्चा खाना नहीं खाना चाहता ,परन्तु ये भूल रही हैं कि इस समस्या का समाधान डाक्टर के पास नहीं स्वयं उनके पास है.उनको भोजन पहले कराईये , यदि पसंद की कोई वस्तु देनी भी है तो भोजन के बाद .उनकी शिक्षिका से बात करिये .बच्चे माता-पिता से अधिक टीचर की बात सुनते हैं,विद्यालयों में औपचारिकता के लिए ये तो कहा जाता है कि घर से भोजन दें बच्चों को ,परन्तु बच्चे वो भोजन कर रहे हैं ,भूखे रहते हैं ये देखने का समय किसी शिक्षक या शिक्षिका के पास नहीं.यही कारण है कि आज बच्चे मोटापे का शिकार हो कर बचपन से हो मधुमेह और घातक रोगों से ग्रस्त होने लगे हैं.न तो उनके लिए शरीर का व्यायाम कराने वाले खेल कूद हैं ,न ही पौष्टिक भोजन .टी वी, इंटरनेट,वीडियो गेम्स,मोबाइल ही उनका मनोरंजन है.इनके विषय में जानकारी होना अनुचित नहीं अनुचित है इन साधनों का दीवाना बनाना .
बच्चों से सम्बन्धित एक समस्या जिसके कारण उनको भी तनाव रहता है और उनकी माँ को विशेष रूप से ,वो है शिक्षा की दूषित प्रणाली .आज बच्चे ज्ञानवान कम रट्टू तोता अधिक बन रहे हैं,प्रोजेक्ट वर्क के नाम पर माएं उनके कार्य पूर्ण करती हैं,और पढ़ाई के लिए ट्यूटर के पास भागना उनकी विवशता है.
आज यदि ऐसे माता पिता को हम खोजने लगें जो बच्चे को राष्ट्र प्रेम से सम्बन्धित कुछ तथ्य बताते हों, ,महापुरुषों के प्रेरक प्रसंग सुनते हों ,राष्ट्रीय पर्वों पर बच्चों को विद्यालय जाने के लिए प्रोत्साहित करते हों तो बिरले ही मिलेंगें.
यदि माँ स्वयं टी वी के भद्दे,समाज को गलत दिशा में निर्देशित करने वाले कार्यक्रम देख कर आनन्दित हैं,सब काम धाम छोड़ कर टी वी से चिपकती हैं तो बच्चों से कैसे आशा की जा सकती है कि वो दूर रह सकेंगें. टी वी कार्यक्रमों को दोष देना समस्या का हल नहीं क्योंकि टी वी के कार्यक्रमों की टी आर पी ही निर्माताओं को ऐसे कार्यक्रम परोसने को प्रेरित करती है.पिता शराब ,गुटके, सिगरेट का सेवन करते हुए बच्चों से झूठ सच बोलते हैं,रिश्वत या भ्रष्ट उपायों से घर की भौतिक समृद्धि को बढाना चाहते हैं,आपसी लड़ाई में बच्चों को मोहरा बनाते हैं,अपने मातापिता का सम्मान नहीं करते हैं, तो बच्चों का भविष्य उज्जवल नहीं बना सकते.
बच्चों के माध्यम से अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करना अनुचित तो नहीं परन्तु उनके भविष्य के ,उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना तो अक्षम्य है..यदि हम देश ,समाज या स्वयं अपने बच्चे और परिवार का हित चाहते हैं तो अपनी सोच को को बदलना ही होगा. 
 नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के इस वाक्य का महत्व समझना होगा ,यदि मुझको सौ माताएं मिल जाएँ तो एक शक्तिशाली और स्वर्णिम राष्ट्र का निर्माण हो जाये
                 

पेड कहे इन्सान से तू क्या काटे मोये


पेड कहे इन्सान से तू क्या काटे मोये


पेड कहे इन्सान से तू क्या काटे मोये
एक दिन ऐसा आयेगा न में रहूँगा न तोये
है अब हाथ हमारे ही खुद को लेई बचाए
पेड लगाये हर तरफ खुशियों की राह बनाये
धरती के बंजर रूप को फिर से हम सब मिल सजाये
कोई भी कष्ट न रहे धरती भी इठलाये,
पक्षियों को भी मिले सुरक्षा और घरोंदा
विलोपित होती प्रजातिया पक्षियों की
हम सुरक्षित रख पाए देश की खुशाली में
ये पहला कदम हम सब मिलके साथ उठाये
ओजोन की जो परत घट रही उस पर रोक लगाये
बडती गर्मी और बीमारी से दुनिया को आज बचाए
आओ सुरक्षित धरती की नीव मिल हम सब आज सजाये

मंगलवार, 4 सितंबर 2012

रिश्ते जीवन में सबसे अनमोल होते है


रिश्ते जीवन में सबसे अनमोल होते है /

हमारे अस्तित्व की वही पहचान होते है /

हम रिश्तो में नहीं जीते रिश्ते हम में जीते है

तभी तो प्यार और सम्मान की डोरे से बंधे रहते है /

जीवन में जब भी कोई ख़ुशी की घड़ी आती है

पुरानी यादो में बसी रिश्तो की लड़ी

आँखों के सामने चलचित्र सी छा जाती है
रिश्ते भी पंछियों की तरह होते हैं,

प्यार और सम्मान हो तो यादो का घरोंदा सजाते है

नहीं तो पंछी की तरह बिना रुके आगे बड़ जाते है,
अगर रिश्तो की डोर आप सख्ती से पकड़ते हैं
तो रिश्ते भी पंछी की तरह बिना प्यार मर जाते हैं,

अगर रिश्तो की डोर हम बिना समझ नम्रता से पकड़ते हैं
तो वो भी पंछी की तरह उड़ हमारे जीवन से दुर कही खो जाते हैं,
लेकिन अगर हम उन्हें हिफाज़त से पकड़ते हैं

प्यार सम्मान और आपसी विशबास के धागों में जकड़ते है
तो हमारे साथ हमेशा के लिए रह जाते हैं ♥

प्यार की खुशबू से हमारे आंगन में सदा

खुशाली का मधुर संगीत गुनगुनाते है

रिश्ते अपनी अहमियत से हमको खुद हर पल रूबरू कराते है
         

रविवार, 2 सितंबर 2012

सच में प्यार ऐसा ही होता है?

क्या सच में प्यार ऐसा ही होता है ?


 मेरा आज का विषय है प्यार,प्रेम,या यु कह लीजिये वर्तमान की भाषा में लव ,मेरे मन मे काफी समय से ये सवाल उठ रहा था की क्या शादी के बाद भी प्यार संभव है ,और यदि हां तो वो किस तरह का प्रेम होता है.आजकल कुछ अनोखी बाते सुनने को मिलते है कि फलाना औरत अपने बच्चो को छोड़कर किसी के साथ भाग गई या किसी आदमी ने अपनी पहली पत्नी को छोड़कर किसी और से शादी कर ली .आज के इस आधुनिक और प्रगतिशील युग में प्यार के मायने ही बदल गये है .जाहा कभी हम शीरीं फरहान कि बात करते थे या लैला मजनू के किस्से सुनते थे .जहा प्यार एक निस्वार्थ और त्याग कि भावना से वशीभूत होता था आज वही यही प्यार त्याग करता नही दुसरे से त्याग मांगता है.कि हमने प्यार किया है और अब आप इसकी सजा भुगतो.मेरे एक सहेली के लिए कुछ डिवोर्स रिश्ते आये है जब डिवोर्स का कारन पुछा तो पता चला की लड़की किसी और से प्यार करती थी पर पापा का दिल रखने के लिए चुप चाप शादी कर ली पर बाद में मौका और प्लानिंग के साथ अपने प्यार को अपना लिया इनसे जाना जाये की उस लड़के ने आपका क्या बिगाड़ा जो उसकी लाइफ अपने प्यार के खेल में आपने बर्बाद कर दी /इसी तरह कुछ लड़के माँ पापा के सामने बोल नहीं पाते की उन्हें लड़की पसंद नहीं या वो किसी और से प्यार करते है पहले तो घर के दवाब में आ कर शादी कर लेता है फेर उस मासूम लड़की को समय समय पर insult सहने को मजबूर कर देता है ऐसी लडकिया या तो depression में चली जाती है या suicide करती है या प्यार की साजिश में बलि चढ़ जाती है पता नहीं ये कैसा प्यार है प्यार करने वालो के दिल में दया और डर दोनों के लिए मोर्डेन समाज में जगह नहीं /
प्यार तो दो आत्माओ के मिलन का नाम है.पर आज के इंसान का किसी एक आत्मा से तो मन भरता ही नही .क्या समय बदलने के साथ साथ आज प्यार भी बदल गया है.प्यार को पूजा का नाम दिया जाता था.पर आज तो यही पूजा आपको गली के हर कोने पर ,नुक्कड़ पर ,पार्क में ,रेस्टोरंट में,घर मे,स्कूल में ,कालिज में ..या ये कह लीजिये कि हर जगह देखने को मिल जाएगी.पहले कभी कभी प्यार के किस्से सुनने को मिलते थे. पर आज तो मानो जैसे सबको ही प्यार का बुखार हो गया है यहाँ तक की लोग नेट पर भी एक नहीं हजारो लडकियों को झूठे प्यार के सपने दिखायेगे emotional खुद की कोई दुःख भरी कहानी सुना अपनी तरफ आकर्षित करेगे फेर उन लडकियों के फीलिंग से धीरे धीरे आपने male ego को हर तरीके से एन्जॉय कर रोने के लिए छोड एक नयी लड़की की तलाश में लग जायेगे,ये फितरत कुछ लडको की ही नहीं लडकियों की भी है यहाँ social साईट पर ये कड़वा सच मैंने अपनी ही कुछ अच्छी नेट फ्रेंड से समझा यकीं मानिये बहुत दुःख हुआ और प्यार जैसे शब्द पर विशबास नहीं रहा और मेरा दिल बोला ..क्या सच में प्यार ऐसा ही होता
है ?
नही…प्यार तो निस्वार्थ ,सच्चा और सामने वाले के लिए कुछ भी कर गुजरने का नाम है.प्यार तो शायद ईश्वर कि स्तुति का दूसरा नाम है .आज का प्यार केवल शारीरिक सुख और तोहफों या गिफ्ट का मोहताज़ रह गया है.आज प्यार मन से नही..तन से.कपड़ो से,पैसे से,या फिर इस दोड़ती भागती ज़िन्दगी में से कुछ पल सुकून के ढूंढने का नाम रह गया है .आज सब लोग प्यार कि तलाश में घर से बाहर जाते है .पहले इश्क के लिए घर से बाहर जाना जरुरी नही था न ही बालो में हेयर जेल लगाना जरूरी था और न ही लड़कियों को तंग या उघडे कपडे पहनना जरूरी था ..अब प्यार केवल इन में ही सिमट कर रह गया हे..अब प्यार केवल काम-वासना कि तृप्ति का साधन बन कर रह गया है /
.हो सकता है कि आज के युग में भी सच्चे प्रेमी हो जो सचमुच एक दुसरे से प्यार करते हो …जिनका प्यार रोजमर्रा कि जरूरतों से कही उपर हो …पर आज के माहौल को देख क्या वो एक दुसरे की फीलिंग को समझ पायेगे क्या विशबास करेगे शायद हाँ /न ,मगर ५०% लव स्टोरी आज सिर्फ टाइम पास बन कर रह गई है ..अगर आपने सामने वाले का जवाब प्यार से नही दिया तो प्यार खत्म ..और पहले के जमाने में प्यार एक से होता था और अब तो अनेक से होता है…ये इश्क,प्यार ,लव,मोहब्बत नही है ये केवल एक का दुसरे के प्रति मायावी खिचाव है …और कुछ नहीं…

बुधवार, 22 अगस्त 2012

भारत की संस्कृति पर भी पश्चमी सभ्यता का रंग चड गया

   
 में एक कवियत्री एक राज कहती हूँ
अपने दिल की बात और एहसास कहती हूँ
समय का चक्र बहुत आगे बड़ गया है
भारत की संस्कृति पर भी पश्चमी सभ्यता का रंग चड गया है
जहाँ पूजते थे बच्चे माँ बाप को भगवान की तरह
कई बार रखते है बुडापे में एहसान की तरह
भूल जाते है ये बुढ़ापा एक दिन उनको भी आयेगा
आज जो उन्होंने किया है कल वही तो उनका बेटा धोरायेगा

में एक कवियत्री एक राज कहती हूँ
अपने दिल की बात और एहसास कहती हूँ
कभी लडकियों के लिए शर्म हया उनका गहना थी
शर्म हया किस चिड़िया का नाम आज की लडकिया ये कहती है
विचारो से मोर्डन हो या नहीं पर कपड़ो से जरूर मोर्डन होती है
करियर की प्लानिंग करे या न करे
पर डेटिंग की प्लानिंग पुरे दिल से करती है

में एक कवियत्री एक राज कहती हूँ
अपने दिल की बात और एहसास कहती हूँ
कभी शादी सात जन्मो का बंधन था
प्यार और जज्बात की डोरे से जुड़ा एक प्यारा संगम था
आज शादी व्यापर बन गया तलाक मुक्ति पाने का हतियार बन गया
लिविंग relation ने अपना घर भारत में भी बना लिया है
लड़के लडकियों ने इन्टरनेट पर झूठे प्यार का घरोंदा सजा लिया है
क्या कहे अब भारत ने मोर्डेन होने की दोड में भी अपना परचम लहरा लिया है

सच है समय का चक्र बहुत आगे बड़ गया है
नई पीडी पर नए सभ्यता का रंग चड गया है
काश कोई समय के चक्र को सही मार्ग पर ला दे
नई सभ्यता में पुरानी सभ्यता का रंग मिला दे
फिर एक खुशहाल भारत होगा,
संस्कृतियों के रंग से रंगा सुंदर असमान होगा
फिर संस्कारो से भरी सुनहरी चिड़िया अपने पंख फैलाएगी
भारत की सुन्दरता का परचम फिर हर देश में लहराएगी

सोमवार, 20 अगस्त 2012

गलत बात सुनकर चुप रहना गलत है।

कभी किसी की गलत मांग को न मानो और न कहना सीखना पड़ेगा लडकियों को :-


भारत हमेशा से और देशो में अपनी संस्कृति अपने संस्कारो के लिए सम्मानित किया जाता है यही एक देश है जहा की स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिए निर्जल ब्रत करती है यही पर एक औरत सारे परिवार को एक प्यार रूपी माला में बांध कर रखती है और भारत ही एक ऐसा देश है जहा सच में परिवार के मायने सीखने को मिलते है पर अफ़सोस आज हमारे देश के नव युवको की सोच कुछ ज्यादा ही मोर्डेन होती जा रही है शायद जहा लडकियों का गहना शर्म हया होता था
 किसी समय आज 25% लडकियों ने उसको भुला दिया/ ये एहसास मुझे facebook ,orkut पर साथ की कई friends से जानने को मिला कुछ ने तो मुझे ये तक बताया की boys की तो छोड़िए वो तो हमेशा से मनचले होते है पर इन social नेटवर्क site पर लड़किया भी कम नहीं जहा लड़के उम्र छुपा कर अपनी शादी छुपा कर अपनी पत्नी के साथ साथ एक अन्य लड़की को भी धोका देकर अपने प्रेम प्रसंग में फसा लेते है वही लड़किया भी खुल कर अपने को expose कर रही है सोचिये जो साईट एक बहुत अच्छा मार्ग है ज्ञान का वही कुछ लोगो की बजह से depression ,suicide का भी कारण बना है कुछ नासमझ लड़के लडकियों के लिए क्योकि वो अपनी marriyada भुल गए है सेक्स chat ,non-veg chat ये दो शब्द जिनसे में अन्जान थी अभी हाल ही में अपने कुछ friends से जाना और यकीं मानिये सुनकर दुःख हुआ की अच्छे दोस्त बनाने के इस माध्यम को लोगो ने गलत रुप में भी use करना सीख लिया/ये कहना गलत है की लड़के लड़की अच्छे दोस्त नहीं हो सकते क्योकि मैने खुद अनुभव किया है अच्छी सोच रख कर दोस्ती करने वाले boys और girl बहुत अच्छे दोस्त भी हो सकते है क्योकि उनकी दोस्ती में कोई गंदगी नहीं होगी दोस्ती का गन्दा होना लड़के लड़की की दोस्ती पर नहीं उनकी सोच पर depend करता है की वो क्या सोच कर दोस्ती कर रहे है /
लडकियों से कहना चाहूंगी जो लड़का सच में आपको प्यार करता होगा वो कभी कोई गलत मांग आपसे नहीं रखेगा वो सदा आपकी इज्ज़त की हिफाज़त करेगा और बिना डरे आपसे और आपके पापा से मान सम्मान के साथ आपको अपने जीवन में लायेगा जो शादी के बच्चनो को लिए बगहर ही अपनी मरियादा खोने के लिए आपको samjhaye वो सिर्फ एक भंवरा है जो टाइम पास करता है ये सोच की शादी तो वही करेगे जहा पापा मम्मी कहेगे तब तक टाइम पास करते है इन emotional प्यार रूपी जाल को बुन कर इसलिए दोस्ती और बात सब से करो पर हम लडकियों को हमेशा याद रखना चाहिए की दोस्त और पति दो अलग रिश्ते है और जो बात पति के साथ सातफेरो के बाद शोभा देती है वो दोस्तों के साथ नहीं चाहे नेट पर हो या फ़ोन पर हो हमारी खुद की इज्ज़त और सम्मान हमारे हाथ है इसलिए कभी किसी की गलत मांग को न मानो और न कहना सीखना पड़ेगा लडकियों को चाहे उसके लिए एक अच्छी दोस्ती ही क्यों न खोनी पड़े क्योकि वो आपका अच्छा और सच्चा दोस्त नहीं है सिर्फ आपका फायदा उठाने के लिए इतना स्वीट बन रहा है /

अगर किसी को मेरा लिखा ये लेख किसी भी प्रकार से दुखी करे या आपको बुरा लगे तो मुझे माफ़ करियेगा मेरा आश्रय किसी का दिल दुखाना नहीं है बल्कि अपनी जैसी कई लडकियों को जो अपनी सभ्यता भुल रही है याद दिलाना है क्योकि पहले कुछ लड़किया खुद ये गलती अनजाने या जान कर, कर जाती है बाद में depression की patient बन जाती है या suicide जैसे कदम उठा अपने माँ बाप को जीते जी मार देती है

विवाह के सात वचन

विवाह समय पति द्वारा पत्नि को दिए जाने वाले सात वचनों के महत्व को देखते हुए यहाँ उन वचनों के बारे में कुछ जानकारी देने का प्रयास कर रही हूँ. यदि आज भी इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो दाम्पत्य सम्बन्धों में उत्पन अनेक समस्यायों का समाधान हो जायेगा और शायद जो शादी की रस्मे बचन वो भुल रहे है वो उनके रिश्ते को फेर मजबूत कर देंगे / 
1.तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी!

यहाँ कन्या वर से कहती है कि यदि आप
कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना. कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांती ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें. यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.)
किसी भी प्रकार के धार्मिक कृ्त्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नि का होना अनिवार्य माना गया है. जिस धर्मानुष्ठान को पति-पत्नि मिल कर करते हैं, वही सुखद फलदायक होता है.पत्नि द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नि की सहभागिता, उसके महत्व को स्पष्ट किया गया है.

2.पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!

(कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ)
यहाँ इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृ्ष्टि का आभास होता है. आज समय और लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की हो चुकी है कि अमूमन देखने को मिलता है--गृ्हस्थ में किसी भी प्रकार के आपसी वाद-विवाद की स्थिति उत्पन होने पर पति अपनी पत्नि के परिवार से या तो सम्बंध कम कर देता है अथवा समाप्त कर देता है. उपरोक्त वचन को ध्यान में रखते हुए वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए.

3.जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!

(तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं(युवावस्था, प्रौढावस्था, वृ्द्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगें, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ)

4.कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!

(कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे. अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ती का दायित्व आपके कंधों पर है. यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूँ )
इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उतरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृ्ष्ट करती हैं. विवाह पश्चात कुटुम्ब पौषण हेतु प्रयाप्त धन की आवश्यकता होती है. अब यदि पति पूरी तरह से धन के विषय में पिता पर ही आश्रित रहे तो ऎसी स्थिति में गृ्हस्थी भला कैसे चल पाएगी. इसलिए कन्या चाहती है कि पति पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से परिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ती में सक्षम हो सके. इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए जब वो अपने पैरों पर खडा हो प्रयाप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे.

5.स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!

(इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है. वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ)
यह वचन पूरी तरह से पत्नि के अधिकारों को रेखांकित करता है. बहुत से व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्य में पत्नि से सलाह करना आवश्यक नहीं समझते. अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नि से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नि का सम्मान तो बढता ही है, साथ साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है.

6.न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम!!

(कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगें. यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ)
वर्तमान परिपेक्ष्य में इस वचन में गम्भीर अर्थ समाहित हैं. विवाह पश्चात कुछ पुरूषों का व्यवहार बदलने लगता है. वे जरा जरा सी बात पर सबके सामने पत्नि को डाँट-डपट देते हैं. ऎसे व्यवहार से बेचारी पत्नि का मन कितना आहत होता होगा. यहाँ पत्नि चाहती है कि बेशक एकांत में पति उसे जैसा चाहे डांटे किन्तु सबके सामने उसके सम्मान की रक्षा की जाए, साथ ही वो किन्ही दुर्वसनों में फँसकर अपने गृ्हस्थ जीवन को नष्ट न कर ले.

7.परस्त्रियं मातृ्समां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!

(अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें. यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.)
विवाह पश्चात यदि व्यक्ति किसी बाह्य स्त्री के आकर्षण में बँध पगभ्रष्ट हो जाए तो उसकी परिणिति क्या होती है--ये आप सब भली भान्ती से जानते हैं. इसलिए इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है.
देखा आपने कि किस प्रकार ईश्वर को साक्षी मानकर किए गए इन सप्त संकल्प रूपी स्तम्भों पर सुखी गृ्हस्थ जीवन का भार टिका हुआ है........


शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

फिर से धरती पर आओ कृष्णा

जागने का वक्त आ गया कृष्ण ...

एक नए अवतार को लाओ कृष्ण

जहाँ दिल में कोई डर न हो आँखों से आंसु दूर रहे

जहाँ अपने बड़ो को इज्ज़त दे मिलके खुशियों के गीत कहे

जहाँ घर में अपना पराया न हो

जहाँ भाई भाई से प्यार करे

जहा कोई कलाई सुनी न हो

हर हाथ में राखी का प्यार दिखे

ऐसा जीवन दे जाओ कृष्ण

फिर से धरती पर आओ कृष्णा...

फिर से धरती पर आओ कृष्णा...



जहाँ कन्या को सम्मान मिले

उसके जीवन को नई उड़ान मिले

जहाँ कन्या भूर्ण हत्या न हो

बेटा बेटी का फर्क न हो

जहाँ भेड़िये जैसी नज़र न हो

भाई को रक्षा धर्म याद रहे

जहाँ बहु को सम्मान मिले

बेटी जैसा प्यार मान मिले

जहा सास और माँ में अंतर न हो

ऐसा कुछ कर जाओ कृष्ण

फिर से धरती पर आओ कृष्णा...

फिर से धरती पर आओ कृष्णा...

फिर से धरती पर आजा ओ कृष्णा...

हमे आपकी बहुत जरुरत है

इस देश में सतयुग लाओ कृष्ण

इस देश में भूखे बालक है...

माखन मिश्री फिर लाओ कृष्ण ...

इस देश को कंस जरासंध है

फिर देश को मुक्त करा दो कृष्णा...

यहाँ हर चौराहे पर द्रोपदी की लुटती है लाज ...

फिर तारनहार बन लाज बचाओ कृष्णा...

फिर से धरती पर आओ कृष्णा...

फिर से धरती पर आओ कृष्णा...

गुरुवार, 16 अगस्त 2012

कही आपके शौक आपकी परवारिश पर सवाल तो नहीं खड़ा कर देंगे गौर करिए इस तरफ भी :-



अगर हम ध्यान से अपने बचपन को ही याद करे तो पायेगे की हम बचपन से अपने पापा ,मम्मी की ज्यादातर आदतों की नक़ल उतारते है, याद है न आप सबको बचपन का एक प्रसिद्ध खेल जो ज्यादातर बच्चे खेलते है/लडकियों का घर घर खेलना छोटा सा घर बनाना उसमे नकली खाना बनाना और मम्मी की नक़ल लडकियों द्वारा उतारते आसानी से देखने को मिलती है उस खेल में /
ऐसे ही लडको का ऑफिस ऑफिस खेलना और पापा की तरह बाते करना,बॉस से
उनकी बातो की नक़ल उतरना जो पापा ने घर आ कर चाये की चुस्की लेते हुए मम्मी को बताई थी और पास खड़े बेटे ने बड़ी गौर से सुनी थी बिलकुल वही नक़ल उतारते थे आप भी जब छोटे थे /
आज जब आप खुद पापा या मम्मी बन गए है तो वो ही आदत आपको अपने बच्चो में भी देखने को आसानी से मिल जाएगी ,कई बार आप अपने लाडले /लाडली को फ़ोन या मोबाइल पर झूट मूट का आपकी तरह बाते करते देखेगे यहाँ तक की जब आप उनसे पुछेगे की बड़े हो कर क्या बनोगे तो ज्यादातर बच्चे वही option बोलेगे जो उनके मम्मी या पापा है जैसे engg , डॉक्टर etc
इतना सब जान कर भी हम वो गलतियाँ करते है जो हमारी खुद की परवरिश पर ? लगा दे हमे पता है छोटे बच्चे हमारी नक़ल उतारते है वो हमसे प्रेरित होते है फिर भी हम उनके सामने गाली देते है जो वो भी सीखते है/
कुछ ladies अपने बड़ो से अच्छा व्यबहार नहीं करती घर पर गुस्से में अंट शंट बोल जाती है वही बच्चे भी सीख जाते है इसलिए हमको बच्चो के सामने क्या बोलना है क्या नहीं ध्यान रखना जरुरी है क्योकि बच्चे बहुत जल्दी सीखते है हर बात /
जो gents सिगरेट और शराब पीते है वो खुद के साथ साथ परिवार का नुकसान भी करते है यही नहीं अपने छोटे बच्चो को दो तरीके से नुकसान पहुचाते है एक बच्चो के स्वस्थ को क्योकि सिगरट का धुआं पीने वाले के साथ उनको भी नुकसान करता है जो उस धुआं को इन्हेल करते है सोचिये आपके नाजुक से बच्चो के lungs भी नाजुक है कितना नुकसान करता होगा उनको आपका ये शौक यही नहीं छोटे बच्चो का दिमाग भी नाजुक होता है जो हर चीज़ को कोत्हुल की द्रष्टि से देखते है जब आप आस पास नहीं होते कई बार नकली सिगरते पीने का खेल भी खेलते है यही नहीं जब teen age में आते है तो आपसे छुपा कर आपकी ही सिगरट पहली बार try करते है और इस गलत शौक के वो भी आदि हो जाते है /
शराब भी आपको दो तरीके से बच्चो का अपराधी बनती है पहला तरीका आप जितने की शराब पीते है उतने में अपने बच्चो के बहुत से शौक पुरे कर सकते है उनके भविष्य के लिए रोज अगर अपनी शराब के पैसे भी गुलक में डाले तो शायद उतना जोड़े लेगे जब वो बड़े होगे की कोई अनमोल तोफा जो उनकी ज़िन्दगी बना दे आप उनको दे पायेगे यही नहीं आपका अनमोल साथ जो नशे की हालत में आप नहीं दे पाते वो आप अपने बच्चो के साथ खेल कर उनको उनकी प्रोग्रेस के लिए मार्ग दिखा कर पास करेगे और परिवार को डर मुक्त भी करेगे की कही लीवर न ख़राब हो और वो आपको खो न दे और आपके द्वारा जोड़ी हुई उनके भविष्य के पुंजी आसु और आपकी बीमारी में न ख़तम हो जाये क्योकि परिवार के लिए आपका जीवन अनमोल है /
दूसरा नुकसान तो आप सबको पता है पर नज़र अंदाज करते है लड़का हो या लड़की आजकल दोनों इस नशे के शौक को आसानी से अपना रहे है और जब घर के बड़ो को इसी मार्ग पर देखते है तो डर और गलती दोनों का एहसास उनसे बहुत दूर है /
ऐसे ही अन्य गलत शौक भी बच्चे अपने बड़ो से बड़ी आसानी से सीखते है इसलिए gents हो या ladies मेरा आग्रह है की बच्चो के लिए आदर्श वताबरण बनाना हमारे हाथ है हमको सोचना है की हमे अपने बच्चो को क्या रहा देनी है हमारे लिए हमारे बच्चे ज्यादा important है या ये गलत शौक / हमे सोचना है हम क्या देखना पसंद करेगे अपनी परवारिश पर सवाल या एक सुखी परिवार /
इस आर्टिकल से मेरा बिलकुल भी किसी को hurt करने का आर्शिया नहीं है में सिर्फ अपने विचार रखना चाहती थी जो मैने अपनी ही २ सहेलियों के परिवार को देख अनुभब किया की मेरे परिवार और उनके परिवार में क्या अंतर है /अगर किसी को कोई बात बुरी लगे तो अपने इस आदमीं को माफ़ जरूर कर दीजियेगा पर अनुरोध है की मेरी बात की गहराई को समझने की कोशिश जरुर करियेगा शायद आपको मेरे विचार सही लगे /

जागरूक समाज नई पहचान

आजकल के समय में एक नया जागरूक समाज नज़र आरहा है सब लोग अपना भविष्य सुन्दर और सजग बनाने की राह में बढ़ रहे हैं! लेकिन इन सामाजिक जग्रतियों के मध्य एक अजीब सी नवीन परंपरा जाग उठी है जो समाज को ना जाने किस दिशा में लेकर जायेगी यह समझ से परे है।
आजकल हर परिवार अपने घर में किसी न किसी पर कार्यरत बहु की कामना करता है और हर लड़का इंजिनियर की डिग्री हाथ में आते ही घोषणा कर देता है की जीवन संगिनी कोई इंजिनियर ही लड़की बनेगी! अर्थात जो लड़कियां कला माध्यम से पढ़ी हैं और जो किसी कंपनी में कार्यरत नहीं हैं वे उनकी योग्यता सूचि से बाहर हैं! तोह प्रश्न यह उठता है के उन लड़कियों का क्या जिनको बिना जाने बिना समझे मात्र उनको एक नौकरी के अभाव में विवाह की योग्यता सूचि से बाहर कर दिया जाता है! मेरी एक सखी है जो एक गुणवान कन्या है और उच्च शिक्षित भी हैं लेकिन उसके पिता ने उसको नौकरी नहीं करने दी! वो स्वयं भी आत्मविश्वासी है और किसी पर आश्रित नहीं है! लेकिन उसके लिए सभी सुयोग्य वर, उससे बिना मिले ही निर्णय ले लेते हैं के ..वो योग्य नहीं! क्युकी उसके पास इंजिनियर की डिग्री नहीं और नौकरी भी तोह नहीं!
मेरी किसी की मानसिकता से कोई शिकायत नहीं किन्तु मैं चिंतित हूँ यह सोचकर की विवाह के पश्चात इन लडको और परिवारों में से अक्सर ज़्यादातर की पत्निया अपनी नौकरी त्यागकर परिवार और बच्चो की जिंदगी बनाने में लग जाती हैं फिर कहाँ जाता है इनका कार्यरत पत्नी का स्वपन.और अगर समाज में इसी प्रकार की सोच बन गयी के अब हर इंसान की सफलता और गुणवत्ता का एक मात्र मात्रक है उसकी नौकरी का होना! यदि नहीं तोह लड़की कितनी भी गुणवान हो किसी भी वजह के चलते उसने नौकरी न करने का फैसला किया हो वह अवगुणी है!
और लड़की में कहीं कोई गुण नहीं बस एक इंजिनियर की डिग्री है और वह एक अछि नौकरी कर रही है तोह उसकी व उसके माता पिता की चिंता दूर है क्युकी वह सर्वगुण संपन्न है
अर्थात अब समाज में परिवार समर्पित लडकियों का कोई महत्व नहीं बचा....
न जाने समाज किस दिशा में जायेगा..

मंगलवार, 14 अगस्त 2012

रिश्तों का उपवन महकते है

 आप ही है जो अपनी जीवन रूपी गाड़ी को सही पथ पर चला सकते है कभी प्यार से तो कभी सख्ती से
  रिश्तों के मायने बदल जाते हैं,         
 नए दायरों में जब बंध जाते हैं.
  खो जाती है अंतरंगता कहीं दूर
    तेवर बदले बदले नज़र आते हैं.
  साथ ही पले ,बड़े होते हैं सब
  सुख दुःख में रोते हँसते जब
  क्यों दूरियां बढा लेते हैं इतनी
   कि अपने दुश्मन बन जाते हैं.

   जिस खून से रिश्ता जुड़ा,प्यासे
   उसी के जाने कैसे बन जाते हैं.
   वार्थ के चश्मे से उजला नहीं
    बस केवल स्याह ही देख पाते हैं.
    धन यश सब कुछ पा लेते हैं ,
   बस अपनेपन को ठुकराते हैं,
   रिश्ते अनमोल होते हैं जग में ,
  उनका मोल नहीं जान पाते हैं.
  आओ मिटा देते हैं कटुता सभी ,
  मिठास से रिश्तों को सजाते हैं
  दीवारें घृणा की नहीं आओ ,
   रिश्तों का उपवन महकाते हैं.


क्या हो गया है बच्चो को जीन माँ पापा ने उन्हे इतनी प्यार और लाड से बड़ा किया आज अपने माँ बाप की सेवा भी नहीं कर पा रहे है उनके साथ कठोर और गलत व्यबहार करते हुए उन्हें शर्म और भगवान का डर भी महसूस नहीं होता ऐसे बड़ो को देख दिल से अपने बड़ो के लिए आदर नहीं शर्मिंदगी महसूस करते है हम बच्चे , कल में अपनी एक आंटी के घर किसी कम से गई वाह एक अनजान औरत से मिलना हुआ वो मेरे मम्मी की उम्र से भी थोड़ी बड़ी थी बेचारी विधवा थी उनसे बात करते हुए महेसूस हुआ मुझे की पति खोने के बाद बच्चो ने उन्हे एक नौकर बना दिया है क्योकि वो कहने लगी अब नहीं रुकुगी मुझे खाना बनाना है नहीं तो बहु datagi वो इन्तिज़ार कर रही होगी मेरा मैने आंटी से पुछा क्या इनकी बहु खाना नहीं बना सकती आंटी ने बताया वो कुछ नहीं करती सारा घर का कम यही करती है ये सुन मेरी नजरो में उस औरत के लिए दया और सम्मान बड़ गया और दिल में उस बहु के लिए क्रोध और शर्म आई की कैसी औरत है मेरे से उम्र में थोड़ी बड़ी है आराम से काम कर सकती है लेकिन माँ के साथ ऐसा व्यबहार कर खुद के करम ख़राब कर रही है उनके खुद के बच्चे जब अपनी दादी के साथ माँ का व्यबहार देखते होंगे तो क्या शिक्षा लेते होगे आज जो उनकी माँ अपनी सास के साथ कर रही है कल बच्चे उनके साथ वही करेगे क्योकि उन्होंने ही तो अपने बच्चो को ये सिखाया है/

मैं इसके लिए बहु से ज्यादा दोषी उस बेटा को मानती हूँ जो अपनी माँ को अपनी बीबी से सम्मान भी नहीं दिलवा पा रहा ऐसे बेटा पाने से तो बेटी होना ज्यादा अच्छा है क्योकि आप हमेशा समाज में अपने आस पास देख लीजिये एक बेटी अपने पति से अपनी माँ पापा को सम्मान दिलवाती है ये ८०% घरो में देखने को मिल जायेगा लड़के खुद गलत है जो घर में कलेश न हो इस डर से उनके बड़ो के साथ होता गलत व्यबहार देख चुप रहते है पतनी का प्यार और सम्मान पर हक है और वो देना भी चाहिए पर अगर वो गलत है और आपके बड़ो के साथ गलत करती है तो आपको विरोध करना चाहिए क्योकि आप ही है जो अपनी जीवन रूपी गाड़ी को सही पथ पर चला सकते है कभी प्यार से तो कभी सख्ती से/

मैं अपने साथ की लडकियों से और उन औरतो से पूछना चाहूंगी की सास और मम्मी में अंतर क्यों अगर हम दोनों जीवन साथी शादी के बाद एक दुसरे के मम्मी पापा को दिल से अपने पापा मम्मी समझ ले तो उनके तकलीफ का दर्द हमे उतना ही होगा जितना अपने parents का और फेर हमारे घर में कभी कोई बड़ा अपमानित नहीं होगा और बड़ो के प्यार और आशीर्वाद के तले हमारा परिवार खूब सुखी रहेगा आशा है अब आप सब भी अपने आस पास ऐसे लोगो को समझा सके शायद किसी बड़े के चेहरे पर आपकी बजह से मुस्कान लौटे तो उनका आशीर्वाद बड़ा हाथ आपके सर पर भी बड़े /

शनिवार, 11 अगस्त 2012

आशा है नव पीडी देश की फिर इतिहास बनाएगी ,भारत माँ के चेहरे से सारे दुःख मिटाएगी


देख  रही   थी  में  कब से  हस्ते  गाते  खिलोनो  को ,
बैसाखी  के  मेलों  को  और  हुलियारे  गलियारों  को ,
मुझे  सुनाई  थी  गाथा   दादी  ने  वीर  प्रताप  की
मुझे  सुनाई  थी  लोरी  नानी  ने  शिव  महान की
कभी   सुना  था  सोने  की  चिड़िया  भारत  देश कहलाता  था
जगदगुरु  का  दर्जा  हिंदुस्तान  ही  सबसे पहले  पाता  था
लेकिन  मेरे  भारत  पे  कैसी  अन्धयारी  छाई  हे
सोने  की  चेडिया  के  घर  में  कंगाली  क्यूँ  आई  हे
हम सब को भारत  की  वो  सोती  तकदीर  जगानी  है
  हमको भारत  के  शाख  शाख  पर फिर खुशियाली  लानी है 

निकलेंगे  हम  फेर से  कृष्ण  को   मुरली  याद दिलाने  को
निकलेंगे हम  राम  को  फिर  शबरी के  झूठे  बेर  खिलाने  को
निकलेंगे हम  महादेव  से फिर भ्रस्टाचार रूपी विष पान कराने  को
 निकलेंगे हम  सब मिल के  गंगा  को  फिर  से  धरती  पर भ्रस्टाचारइयो को मुक्ति  दिलवाने को
में  निकली  हूँ  देश  के  हर बच्चे  को अपना  भारत  का सम्मान याद दिलाने  को
शावक  के  दांतों  को  गिनने  की  वो  प्रथा  बताने  को
में  निकली  हूँ बंज़र  भूमि  में  फिर  फूल   खिलाने  को

भगत  सिंह  अशफाक  का  तुमको  जीवन  याद   दिलाने  को
हर  माता  को  पन्ना  का  फेर वो  त्याग याद दिलाने को .
कुरुक्षेत्र  का  धरमयुद्ध  अब  उनको  याद  नहीं  आता
अर्जुन  का  गांडीव  कृष्ण  का  गीता  ज्ञान  नहीं  आता
याद  नहीं  आते  उनको  दशरथ  के  बेटा  राम  की
दुराचारियों  के  जीवन  पर  वो  ही  पूर्ण  विराम  की
राम  वाही  थे  जिसने  रावन   को  लंका  में  मारा  था
पत्थर  बनी  अहिल्या  को  छूकर  इस  जग  से  तारा  था
अपने  अंतर्मन  में  झांको  राम  वाही  मिल  जायेंगे 
जिनके  ह्रदय  कलुषित  हो  वो  राम  कहा से  पाएंगे
राम  बसे  हैं  कण  कण  में  तुमको  बतलाने  निकली  हूँ
रावन रूपी बुरइयो से भारत बचने निकली हूँ

आशा है नव पीडी देश की फिर इतिहास बनाएगी
भारत माँ के चेहरे से सारे दुःख मिटाएगी
भ्रष्टाचार रूपी राक्षस से सोने की चिड़िया के पंख फिर वापस दिलवाएगी /

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

कान्हा का चरित्र एक आदर्श

श्री कृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष में आज कान्हा के चरित्र से जो मैने समझा और सीखा आप सब के समक्ष कहना चाहूंगी/ श्री कृष्ण ने अपनी लीलाओ के माध्यम से समाज में स्त्री और पुरुष के बीच रिश्तो की कुछ नये व सर्वथा शब्द्पूर्ण परिभाषाये सामने रखी यही नहीं द्रोपदी का प्रसंग हो या गोपियों का मान रखने की बात हो तो कृष्ण ने हर महिला से अपने रिश्ते का मान रखा और समाज को एक मिसाल दी ,हमे देश सुधार लाने का मार्गदर्शन भी कान्हा के चरित्र से सीखने को मिलता है:-
स्त्री को स्बलम्बी और समाज में समानित स्थान दिलाया :-

वे स्त्री का सम्मान करते थे उन्होंने स्त्री को स्बलम्बी बनने का अधिकार दिया और स्त्री को भी सक्षम व्यक्तित्व के तौर पर साबित करते चलते गए उद्धरण के तौर पर उन्होंने अपने हर कार्य में अपनी पत्नी को अपना सलहाकार माना तभी तो जब वासुदेव की दरिदता दूर करनी थी तो उन्होंने लक्ष्मी जी को वासुदेव के घर की कायापलट करने भेजा /
जरसंध को पराजीत करजब उसके बंदिग्रहा से राजकुमारियो को मुक्त कराया गया तो उन बेकसूरों के समक्ष सामाजिक बहिष्कार का सबसे बड़ा खतरा था कान्हा ने उनको vibha बंधन में बांध कर समाज में स्थान दिलाया साथ ही इस तथ्य की नीव रखी की स्त्री की पवित्रता उसके शारीर या उसकी स्थतियो से जोड़कर नहीं देखी जानी चाहिए बल्कि जो बेक़सूर स्त्री है उनको अगर मौका मिलता है समाज में सर उठा कर जीने का तो प्रोत्साहित करना चाहिए /

कन्या हत्या के विरोधी थे कान्हा :-

राजा कंस द्वारा ७ कन्याओ को निर्मम हत्या के बाद जब कृष्ण का जन्म हुआ उनका ये अवतार ७ नवजात कन्याओ के हत्यारे ,अनाचारी कंस के लिए था /कन्याओ की हत्या कंस के वध का प्रमुख कारण बनी /इस नाते कृष्ण ने समाज को कन्या हत्या एक जघन्य अपराध बताया और बताया की ऐसे अपराधी को मृतुदंड से कम का भागी नहीं माना जाना चाहिए समाज मृतुदंड नहीं दे सकता तो ऐसे लोगो का बहिष्कार कर उनको सख्त सजा तो दे सकता है /

लड़का एवं लड़की अच्छे दोस्त भी होते है उनकी दोस्ती में निस्वार्थ प्रेम भी हो सकता है इसलिए समाज की गन्दी सोच को कान्हा की इस लीला ने बदला :-

कृष्ण का प्रेम योगी का प्रेम था / उन्होंने महिला और पुरुष के बीच दोस्ती का एक नया रिश्ता स्थापित किया जो हमे शिक्षा देता है की पुरुष और स्त्री की दोस्ती को गलत नज़र से देखना हमारी छोटी और गन्दी सोच को दर्शाता है हमे लोगो को सुधारने की नहीं खुद को सुधारने की जरूरत है/
पांडव पत्नी द्रोपदी के अत्यंत प्रिय सखा थे कान्हा जो द्रोपदी के हर संकटकाल में सच्चे दोस्त की तरह उनके साथ खड़े रहे चाहे वो चीरहरण की बात हो या द्रोपदी को उनका सम्मान वापस दिलाने की बात हो /
                  इसलिए मेरा मानना है की कृष्ण एक ऐसे देव है जिनके चरित्र से हमे आज के समाज में फैली दुर्भावनाओ और करुतियो में सुधार की सही दिशा मिलती है /

मम्मी सारथि है हमारे जीवन रुपी गाड़ी की तो पापा वो Krishna है जिन्होंने हमेशा अपने विचारो और उपदेश से भागवत में पार्थ को सही मार्ग दिखाया ऐसे ही पापा हमे सही मार्ग दिखाते है इस सफ़र में .......

हम हमेशा माँ के लिए ही अपनी फीलिंग्स बताते है की माँ अनमोल है वो हमे जीने का सलीका सिखाती है ,वो है तो हम है आज हम जो भी है अपनी मम्मी की बजहा से पर कभी अपने जीवन के उस अनमोल रिश्ते को भी salute करना हमारा बहुत बड़ा हक़ है जिन्होंने हमको हर लम्हा अपने प्यार से सीचा हर बच्चे के जीवन में वो उतने ही अनमोल है जीतनी माँ ,जिनके होने से हमारा अस्तित्व है जो हमे ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाते है जिनके आशीर्वाद के तले हम खुद को म्हेफूज़ समझते है , 
                    जो बॉय child के लिए उनका आदर्श होते है हर लड़का चाहता है की वो अपने पापा का नाम रोशन करे पापा गर्व से कहे की देखो मेरा बेटा ने मेरे को गर्व का एहेसास कराया,हर बेटा पापा के व्यक्तित्व में अपना खुद का चेहरा बनता है याद है न बच्चपन की वो बाते जो अनजाने ही सही आपको आज भी याद आती है तो मुस्कान लाती है और शाएद हर इन्सान ये जरूर करता है पापा को देख पहली बार खुद छुप कर उनके शेविंग किट से शेव बनाना try करना और पापा का प्यार से आपको चिपकाना और समझाना बेटा जब बड़े होगे तब करना में खुद अपने ही भाइयो को ऐसे करते देखा और पापा का वो मुस्कुराना आज भी याद है यही नहीं कई बार पापा के ऑफिस जाने की नक़ल तो मानते है न आप पापा हमारे सबसे बड़े आदर्श है और सबसे पहले भी /
                      Boy child की तरह girl child के लिए भी उसके पापा उसके आदर्श है इसका एक बहुत अच्छा उधारण है अगर आप लडकियों से प्रशन पूछे तो ८० % लडकिया ये कहेगी की उनका पति उनके पापा जैसा स्मार्ट, intelligent ,well-behaved , होना चाहिए क्योकि बचपन से ही वो अपने पापा से प्रभाबित होती है, इसलिए वो जो छवि अपने lifepatner की बनाती है वो कही न कही उनके पापा के तरह acchaiyo से भरा होना चाहिए/
मानते है न आप सब पापा कितने अनमोल है हमारे लाइफ में ये भी कहा जा सकता है अगर मम्मी सारथि है हमारे जीवन रुपी गाड़ी की तो पापा वो Krishna है जिन्होंने हमेशा अपने विचारो और उपदेश से भागवत में पार्थ को सही मार्ग दिखाया ऐसे ही पापा हमे सही मार्ग दिखाते है इस सफ़र में ...

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

माफ़ करना बहुत जरूरी है पर गलती का एहसास दिलाने के बाद



किसी को  माफ़  करना बहुत ही अच्छा है क्योकि इस से लोगो के दिल में दुरिया नहीं आती है और रिश्ते की मिठास हमेशा बनी रहती है/ पर यहाँ  एक  बात  जरूर  कहुगी किसी  को  माफ़  करना  बहुत  अच्छी बात  है  में  भी  इस  बात  से  सहमत  हूँ पर  ये  भी  जरूरी  है  की  जिसको हम माफ़ कर रहे है  उसकी  गलती  का  एहसास  हो  जाये  क्योकि  कई  बार  हम  किसी  की  गलती  के  लिए  उसे  माफ़  कर  देते  है  जब   वो  गलत करता है तो वो उससे हमारी हार या कमजोरी मान जाता है और बार बार गलती कर गलत रास्ते पर कदम बड़ा लेता है जिसके कारन  हम होते है क्योकि पहली गलती पर माफ़ कर हमने उससे प्रोत्साहित किया था

          इसलिए  माफ़  जरूर  करिये  पर  गलत  इंसान  को  उसकी  गलती  समझाने  के  बाद , उधारण के  तौर  पर  दो  प्रकार  सामने  रखुगी  :-

अगर  मम्मी  पापा  अपने  बच्चे  को  उसकी  पहली गलती  पर  बिना  सख्ती  दिखाए  माफ़  कर  दे  तो  वो  गलत  रास्ते  चला  जायेगा  ,इतिहास  में  बहुत  से  ऐसे  example है .एक  कहानी  बहुत  मशहूर है  शायद   आपने   भी  सुनी  हो  एक  बच्चा स्कूल  से  रोज  कभी  किसी  का  पेंसिल  और  कभी  कुछ  और  चुरा  लाता   था  उसकी  माँ  हर  बार  उसको  माफ़  कर  देती  थी  धीरे  धीरे  समय  के  साथ  वो  एक  बड़ा  चोर  बन  गया  एक  बार  पकड़ा  गया  तो  उसको  उम्र  कैद  हुई  उससे  पुछा गया   की  किसी  से  मिलना  चाहते  हो  तो  उसने  माँ  से  मिलना  मंजूर  किया  जब  माँ  आये  तो  उसको  पास  बुला  उसका  कान कट  कर  लिया  पूछने पर  बोला  अगर  पहली गलती  पर  मुझे  डाटा  होता  गलती  का  एहसास कराया  होता  तो  आज  में  एक  अच्छा  और  सच्चा  इन्सान  बनता  आज  जो  हूँ माँ  की  माफ़ी  का  नतीजा  हूँ /
एक  और  बात आज  देश  में  रेप केसेस  तेजी  से  बड  रहे  है  और  ज्यादा  तर  बड़े  घरो  के  लड़के  लडकिया  इन  हरकतों  में  शामिल  होती  है  क्यों  क्योकि  जब  उनकी  पहली   गलती  की  शुरुबात  होती  है  तो  माँ  बाप  दोस्त  यार  उनकी  नादानीया या  ये  सोच  की  समय   के  साथ  सुधर  जायेगे  माफ़  कर  देते  है  और  ये  उग्रे  रूप  ले  लेता  है .अगर  पहली   बार  जब  किसी  लड़के  ने  girl को  छेड़ा या  किसी  लड़की  ने  किसी  को  उकसाया  छेड़ने  के  लिए  उसी  वक्त  बड़े  उनको  माफ़  करने  की  जगह  सख्ती  का  रुख  अपनाये  तो  शायद  50% crime कम  हो  जाये .
आज  अगर  हम  समाज  को  गौर  से  देखे  तो  हमारे  देश  में  भी  छोटे  छोटे  बच्चे  cigrate aur sharab पीते मिल जायेगे  कारन  बड़े  उनको  समझा  कर  छोड देते  है  की  बेटा  ये  नुकसान  करेगा  पर  कभी  कोई  सख्त  कदम  नहीं  उठाते  जब  यही  सिगरते  शराब
drugs उनके  बचो  को  निगल  जाती  है  तब  ehessas करते  है  की  काश  हमने  माफ़  करने  से  पहले थोड़ी  सख्ती  भी  की  होती  तो  आज  हम  अपने  बेटा  बेटी को  इन बुरइयो  से  दूर रख  पाते आज  देश  में  dowry की  बजह  70% parents परेशान है  या  तो  बेटी  की  शादी  नहीं  कर  प्  रहे  या  शादी  के  बाद  लड़की  जला  दी  जाती  है  या  मर दी  जाती  है  अगर  जब  पहली  बार  dowry case अदालत  में  आया  था  तब  सख्त  कदम  उठता  तो  शायद   आज  ऐसी  situation कभी  नहीं  होती ......................
.......... इसलिए  माफ़  करना  बहुत  जरूरी  है  पर  गलती  का  ehesas दिलाने  के  बाद  जिसको  अपनी  गलती  का  एहेसास  नहीं  उसको  माफ़  कभी  नहीं करना  चहिये क्योकि  इससे  हम  देश  की  नीव कमजोर  करते  है .

आपका छोटे से छोटा प्रयास भी बहुमूल्य है।



एक बार एक गाँव में आग लग गई, सारा गाँव उस आग को बुझाने में लगा था. एक चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरती और आग में डालती. फिर पानी भरती और फिर आग में डालती, वो बार बार यही काम कर रही थी. एक पेंड पर एक कौवा बैठा ये देख रहा था वो चिड़िया से बोला- अरी पागल ! तू चाहे कितनी भी मेहनत कर ले लेकिन तेरे बुझाने से आग नहीं बुझेगी.

इस पर चिड़िया विनम्रता से बोली - मैं जानती हूँ कि मैं इस आग को नहीं बुझा सकती, लेकिन जब भी कभी गाँव की इस आग का जिक्र होगा तो मेरी गिनती आग बुझाने वालों में होगी और तुम्हारी तमाशा देखने वालों में. अब आप बताइये आप किसके साथ हैं ?? चिड़िया के साथ या कौवे के साथ ??

याद रखिये , आपका छोटे से छोटा प्रयास भी बहुमूल्य है .

सोमवार, 6 अगस्त 2012

बच्चो को दोस्त बनाइए

क्या सही है बच्चो के लिए अभिभावक बनना या फेर एक अच्छा दोस्त जिससे वो कुछ न छिपाए
में यहाँ अपना अनुभव आपके साथ बाटना चाहती हूँ जो में अपने कॉलेज के समय अपने साथ के और दोस्तों से अनुभव लिया और जो मेरी अभिभावक ने मुझे सिखाया मुझे लगता है की अगर आप और अपनी सारी पीडी के साथ अपना ये अनुभव बाटू तो शायद कुछ अच्छा जो में अपने बड़ो से सिखा आपको बाता पाऊ और हमारी पीडी के अभिभावक अपने बच्चो को सही मार्ग दर्शन दे सके /मैने देखा है कई अभिभावक बच्चो पर अंकुश लगते है खास तौर पर लडकियों के लिए की लडको से दुर  रहो ,अकेले बाज़ार न जाओ पिक्चर देखने दोस्तों के साथ न जाओ इतनी अंकुश किसी भी बच्चे पर लगाना सही है आपको लगता है इससे बच्चा सही मार्ग पर रहेगा पर अफसोस आपकी ये सोच गलत है अपने बच्चो को सही गलत की पहचान कराइए उनको बताइए क्या उनके लिए सही है क्या गलत //

मेरी मम्मी ने मुझे कभी किसी बंधन में नहीं बांधा बल्कि घर के बड़ो ने जब मम्मी को बोला की इसको co-education में पड़ा रही हो वाहा आपको सही लग रहा है तो उन्होने बहुत अच्छा बताया मुझे ही नहीं मेरे बड़ो को भी की कभी चुम्बक को देखा है negative सीरा हमेशा positive सिरे को अपनी ओर आकर्षित करता है यही आकर्षण लड़के और लडकियों के बीच होता है जितना इस आकर्षण से बच्चो को बच्चओगा वो उतना ही उस ओर भागेगा इसलिए उनको सही रास्ता दिखाओ/उन्होने कहा बच्चो को उनकी limitation समझनी चाहिए उनको ये पहचान करना सिखाना चाहिए की उनके लिए क्या सही है क्या गलत उनको अपने फैसले लेना खुद आना चाहिए लडके हो या लड़की दोस्त बनाओ लेकिन अपनी मरियादा कभी न भूलो

अगर में दोनों तरह के बच्चो को दो हिस्सों में बाटु एक वो जो अंकुश में जीते है एक वो जिनके अभिभावक उनको सारी छुट देते है तो मुझे लगता है शायद आप खुद अच्छा से सोच पायेगे में क्या कहना चाहती हु और मुझे भी पता चलेगा की मेरी सोच कितनी सही है //

  अंकुश पर जीने  वाले बच्चो  का द्रष्टि कोड़ :-

1.मम्मी पापा से झूट बोल कर घुमने जाना /

2 मम्मी पापा से झूट बोल कर पिक्चर जाना /

3 अपनी छोटी बड़ी सब बाते बड़ो से छुपाना /

4. 80% सर्वे रिपोर्ट बोलती है की जो बच्चे गर्ल स्कूल या बॉय स्कूल में पड़ते है कॉलेज में आते ही गर्ल फ्रेंड ,बॉय फ्रेंड जैसे रिश्ते ही नहीं बनाते कई बार बहक  भी जाते है क्योकि पंछी पहली  बार कैद से आजाद हुआ है और प्यार भरी धोके की दुनिया में खो जाते है क्योकि दिल की बात किसी भी बड़े से नहीं बाटते इसलिए कई बार गलत फैसला कर जाते है कोई उन्हे सही मार्ग दिखाने वाला नहीं होता और चोट खा कर संभलते है/

किसी बंधन में नहीं बंधे बच्चे :-

1. मम्मी पापा से बोल कर घुमने जाना /

2 मम्मी पापा से बोल कर पिक्चर जाना /

3 अपनी छोटी बड़ी सब बाते बड़ो से खुल कर बताना /

4 80% सर्वे रिपोर्ट बोलती है की जो बच्चे बंधन में नहीं जीते वो हर बात मम्मी पापा से शेयर करते है समय समय पैर आप उनको सही रास्ता दिखा सकते है और क्योकि वो co -education में पडे है तो उनका आकर्षण कम होता है वो लडको को भी फ्रेंड की तरह लेते है/

अब आप बताये क्या सही है बच्चो के लिए अभिभावक बनना या फेर एक अच्छा दोस्त जिससे वो कुछ न छिपाए / बच्चो पर अंकुश लगाना या उनको प्यार से सही रास्ता दिखाना ??????
 

क्यों कई बार शादी बन जाती है लडकियों के लिए depression का कारण


आप सब सोच रहे होंगे की आखिर आज में ऐसा टोपिक क्यों लिया कही इसलिए तो नहीं की में खुद एक लड़की हूँ इसलिए लडकियों के लिए आप लोगो को भाबुक कर रही हूँ / नहीं ऐसा बिलकुल मत सोचियेगा में सिर्फ आप लोगो से कुछ बाते शेयर करना चाहती हूँ जो मेरा खुद का अनुभव भी है और अपने हम उम्र से बाते कर मैंने जाना अपनी कुछ कॉलेज फ्रेंड और कुछ fb फ्रेंड के अनुभव से समझा की ये भी एक बड़ी परेशानी है जिसके कारण कई लडकिया depresstion की patient बन जाती है /चाहती हूँ की आप ये आर्टिकल जरूर पडे और अपना अमूल्य बिचार हम सब के साथ शेयर करे जिससे शायद कुछ लडकियों को depresstion से बहार आने का रास्ता मिले और शायद कुछ बड़े जो इसका कारण हो अपने घर में सुधार ला सके बस ये एक कोशिश है आप तक एक महतबपूर्ण परेशानी को रखने का /

मैंने अनुभब किया की शादी की बाते भी कई बार एक लड़की के आत्म विश्बास को तोड देती है ,में आपसे खुद का एक अनुभव शेयर करती हूँ मेरे रिश्ते की बात एक जगह चली जब वो मुझे देखने आये तो २० लोग आये मुझे देखने जिन्होने मुझे चला कर देखा,कई जानो के साथ खड़ा कर नापा की लम्बाई जो बताई है वो सही है ,उसके बाद कही हां किया फेर शुरू हुई दहेज़ की कहानी आखिर कर मेरे घर वालो ने न कर दी बोले की अभी ये हाल है तो शादी के बाद क्या होगा क्योकि मेरी परिवार मुझे बेहद प्यार करता है इसलिए उन्होने मुझे कभी कुछ नहीं कहा पर माँ पापा का दुःख समझ आता है /मेरे परिवार की समझदारी और प्यार की बजह से मुझे फर्क नहीं पड़ा पर यही घटना मेरी एक सहेली के साथ हुई और उसकी परिवार ने उसकी गलती न होते हुआ भी उसको खूब कोसा की घर की परेशानी का कारण है अब आप बोलिए क्या ये सही है .??...........
क्या एक लड़की को show peace की तरह देखना सही है वो भी इन्सान है सोचिये उसके दिल पर क्या बीतेगी,वो माँ जो अपने बेटे के लिए उसको देखने आये है कैसे भूल गए एक दिन वो भी इस दौर से गुजरी थी तब उनका अनुभव कैसा था उनको तो आगे की पीडी में सुधार लाना चाहिए था और वो पड़े लिखे युवक जो अपने लिए एक अच्छा जीवनसाथी चाहते है जिसके जीवन में खुशिया लाने का promise करते है क्यों ऐसा होने देते है क्यों भूल जाते है उस लड़की के सम्मान को ..............
एक और कारण लड़की को आस पडोसी देर से शादी होने पर कोई न कोई फ़ब्तिया कसते रहते है हर वक्त ये कहते रहना की compromise करना सीखो उन लोगो से पुछा जाये की compromise की परिभाषा क्या है /क्योकि हर लड़की शादी के बाद compromise करती है मेरे हिसाब से कोम्प्रोमिसे का मतलब नए घर के हिसाब से खुद को बदलना है अपने बड़ो की बाते को दिल से न लगा कर उनकी बातो का सम्मान करना है/ अपने साथी के साथ कदम से कदम मिलाना है जिसके लिए खुद में कुछ बदलाब करना है/

न की जो आपको पसंद नहीं उससे जबरदस्ती शादी करना दुसरो के बोलने पर जब आपको साफ़ दिख रहा हो की बिचार धारा में काफी अंतर है आप उनके साथ ताल नहीं मिला पाओगे जब खुद खुश नहीं रहोगे तो अपनों को कैसे ख़ुशी दोगे और क्या हमे हक है किसी और के जीवन में परेशानी लाने का मुझे लगता है नहीं
और क्या सही है एक लड़की को बार बार बाते सुनने का जिससे वो दुखी हो और ये दुःख उसके depression का कारण बने जब वो बार बार अपने मम्मी पापा की आँखों में नमी देखे /

कहते है न जोडिया ऊपर वाला बनता है जिसके लिए जो बना है जब तक वो नहीं मिलता तब तक सयोग नहीं बनता तो रोकिये किसी को दोष देने और किसी के दिल को ठेस लगाने से खुद को और अपने घर की बेटियों को कमेंट्स नहीं प्यार दीजिये और प्यार लीजिये जब तक वो आपके घर है ये यादे अनमोल होगी आपकी बेटी के जानने के बाद/ मत लो आप उसके होटो की हंसी मत धकेलिए उसको अंधकार में

दहेज एक श्राप है समाज का

कोई टोपी, तो कोई अपनी पगड़ी, बेच देता है........
मिले गर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है......

जला दी जाती है ससुराल मेँ, अक्सर वही बेटी...
जिस बेटी की ख़ातिर, बाप अपनी किडनी बेच देता है...

आज दहेज़ एक बहुत बड़ी कृति बन करसामने आए है और कही न कही समाज के लड़के पक्ष ही नहीं लड़की पक्ष भी इसका जिम्मेदार है /जो इन्सान (पिता) अपनी बेटी को पड़ा लिखा कर काबिल बनता है वो उसके भाग्य और क़ाबलियत पर भरोसा नहीं कर पाते उनको लगता है की जीवनसाथी के बिना वो कैसे जीवन काट पायेगी /
अपने उसको  इस काबिल बनाया है की वो जीवन के हर संघर्ष का सामना करने के लिए सक्षम है इसलिए शादी जरूर करे पर साथी सर्च करने में जल्दी न करे और दहेज़ के लालचियो को बिलकुल कबूल न करे जो इन्सान आपकी लड़की को उसकी क़ाबलियत पर नहीं बल्कि इस बूते पर अपनाते है की वो साथ में कितना पैसा लातीहै वो कभी उसको दिल से प्यार नहीं दे सकता है क्योकि उसके आँखों पर तो पैसे की पट्टी बंधी है//
बेटी उसको दीजिये जो आपकी बेटी को प्यार विशबास दे जो उसकी क़ाबलियत को समझे और फेर जो बिन मांगे शादी करे उसको अपने दिल से जो अपने अपनी बेटी के लिए सोचा है वो दे कर सारे अरमान आप पूरे करे "क्योकि बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले न भिक "कहावत किसी बिधवन ने लिखी है और अगर हम अमल करेगे तो अपनी बेटी का भविष्य तो सुधरेगी साथ साथ इस दहेज़ रुपी बीमारी को भी समाप्त करने में अपना योगदान दे पायेगे .

कई बार लडकिया क्यों समझती है शादी को स्त्री का शोषण विवाह के नाम पर कही इसका कारन परिवार या समाज तो नहीं:-

एक वक्त था जब नारी का स्वयंबर कर उसको अपने लिए बोलने का अधिकार दिया जाता था और तभी किसी का साथ हमकदम बनाया जाता था जब दोनों ये सोच लेते था की हम एक दुसरे के साथ ताल मिला कर अच जीवन यापन कर पायेगे , विवाह एक पवित्र बंधन है और हम को उसका सम्मान करना चाहिए, किन्तु समय के साथ जब मैं स्वयं विवाह योग्य होकर उस देहलीज़ पर आई तोह जाना की कई बार बड़ो का समझाना लडकियों के लिए पर
परेशानी का कारन बन जाता है कई लडकिया अपने को परिवार से दुर करती चली जाती है और कुछ ऐसा सोचने को मजबूर हो जाती है की माँ पापा का अनमोल प्यार खुद इस एक समस्या के कारन  उन्होने अपने जीवन से दुर कर दिया है शायद आप सब एक लड़की के दिल की ब्यथा उसके इन शब्दों की गहराई से लगा पाए की लड़की के कोमल दिल पर कैसा अघात होता है कई बार बड़ो की जबरदस्ती का :-
किसी भी स्त्री के लिए और उसके साथ इस व्यवहार का कोई और नहीं उसके माता पिता पूरा उत्तरदायित्व लेते हैं. सर्वप्रथम जिस देश में स्वयंवर की प्रथा रही हो वहां की ही कन्याओं को यह कहने का अधिकार लगभग माता पिता छीन लेते हैं के वो कैसा जीवन साथी चाहती हैं, द्वितीय यह की वर पक्ष अपनी मनमानी चलाता है , उनके सुपुत्र अति सुन्दर बलवान और सर्वगुण समपन्न हैं उनका ही मान है और चयन का अधिकार तोह उनकी बपौती है, लड़की कितनी भी गुणवान सुन्दर क्यूँ न हो किन्तु उसको अक्सर अपनी भावनाए मन के किसी कोने में बंद करने के लिए दवाब बनाया जाता है, कई बार यह बलपूर्वक तोह कई बार मानसिक रूप से दवाब बनाकर किया जाता है, कई बार प्रेम के बंधन में जकड़कर मानसिक रूप से ऐसा कहकर के " हम क्या तुम्हारे दुश्मन हैं ? हम क्या तुम्हारा बुरा सोचेंगे ?
लड़की को मजबूर किया जाता है एक अनचाहे बंधन को स्वीकारने के लिए. यह सत्य है माता पिता बुरा नहीं सोचेंगे किन्तु क्या लड़की भी अपने लिए  गलत चाहेगी.......ऐसी कौन सी  बेटी है जो माता पिता को दुःख देना चाहेगी लेकिन एक मनुष्य होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति एक सोचने समझने की शक्ति और चयन करने की अपनी विचार लेकर जन्मता है एक लड़की को अपनी वह चेतना त्यागने को क्यों बाध्य किया जाता है. लड़की सक्षम हो या नहीं, वह कार्यरत हो या नहीं हो किन्तु सदैव उसके सामने यह स्तिथि आती हैं. ख़ास कर जब वह एक मध्यमवर्ग से हो.
वैवाहिक जीवन किसी और की ख़ुशी के लिए आरम्भ करना या अपने माता पिता को ख़ुशी देने के लिए किसी जीवित प्राणी की स्वीकारना स्वयं से ही नहीं मानवता से भी धोखा करने जैसा है. जिसको अपनाओ पूरे मन से किसी की ख़ुशी के लिए महानता दिखाना क्या सही होगा शायद ऐसे ही वैवाहिक सम्बन्ध  टूट जाते होंगे जिनमे जीवनसाथी का साथ देना है हर स्तिथि में इसका कारन विचारो का न मिलना होता होगा . क्या अंतर है पकडवा विवाह और इस प्रकार के विवाह में, जकड़ना जबरन एक अनचाहे रिश्ते में........... अब इसका क्या हल है में भी नहीं समझ पाई शायद  आप लोग अच्छे  से समझ सके

अब तो बस आस ही रख सकते है हम की आने वाली पार्टी जो कह रही है वो करके दिखाएगी , और सुना भी है हमने आस पर दुनिया कायम है/ :-


राजनीति करना कोई बुरी बात नहीं है और न केवल एक परिवार बिशेष के लिए आरक्षित काम है लेकिन आज तक जिनको बुरा कहते आये हैं उनके जैसा ही बन जाना भी ठीक नहीं है . राजनीति करने के लिए आपको हर वो कार्य भी करना पडेगा जिनको बुरा कहते हैं. चुनाव जीतने के लिए सभी हथकंडे अपनाने होंगे.

आपको चुनाव के लिए, हर गलत -सही तरीके से फंड भी जुटाने होंगे , जाति-वाद भी देखना होगा
, सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और मीडिया के लोगों का भी तुष्टीकरण करना होगा . बहुत सारी गलत बातों को भी नजर अंदाज करना होगा जिन आज आप खुलकर बोल सकते हैं .

बैसे अगर अच्छे लोग राजनीति में आयें और जैसा कह रहे हैं बैसा ही करे , तो देश के लिए बहुत अच्छी बात होगी. अभी ऐसा लग रहा है कि - अन्ना की नई पार्टी में केवल अच्छे लोग ही होंगे लेकिन पार्टी बनने के बाद यहाँ भी कुछ ही दिन में भ्रष्ट लोगों का कब्जा हो जाएगा.

अनपढ़ नेताओं से तंग आकर जनता ने पढ़े लिखे नेताओं से भी बहुत उम्मीद की थी लेकिन क्या हुआ ? मनमोहन सिंह, चिदम्बरम, कपिल सिब्बल, अजीत सिंह, आदि ने पढ़े-लिखे लोगों से जनता की उम्मीद को कैसे तोडा है ये सबको पता ही है/
अब तो बस आस ही रख सकते है हम की अन्ना की पार्टी जो कह रही है वो करके दिखाएगी , और सुना भी है हमने आस पर दुनिया कायम है अब सारी डोरे ऊपर वाले के हाथ हम और अन्ना दोनों कठपुतली है जिसकी डोरे देश के आने वाले waqut के हाथ है जहा अन्ना भारत रूपी मंच पर खेलने वाले कलाकार है और हम वो दर्शक जो टिकिट (वोट)देकर तमाशा देखने आये है की happy ending होगी सब घोटाले और कालाबाजारी ख़तम होकर या अन्ना की टीम भी इस घोटाले और फरेब में लिप्त होकर sad ending दिखायेगे इस मंच पर/

शनिवार, 30 जून 2012

शादी करते वक्त क्या देखे


 शादीशुदा और बाल-बच्चों वालों से विवाहयोग्य-अयोग्य लोग पूछा करते हैं, भैया जी! शादी के बारे में आपका क्या ख्याल है? शादी करनी चाहिए या नहीं? ये पूछताछ उन सर्वोत्कृष्ट औपचारिकताओं में होती है जो आदमी अपनी जिन्दगी में कर सकता है। क्योंकि ये प्रश्न अक्सर वो लोग करते हैं - जिनके मन में शादी के लड्डू फूट रहे होते हैं... जो इन भावनाओं के मजे ले रहे होते हैं और कहीं ना कहीं, नये रिश्ते का इंतजार भी कर रहे होते हैं... यानि ये प्राणी निश्चित ही शादी की तारीख तय कर चुके होते हैं। जिनको शादी से कोई मतलब नहीं, वो किसी तरह के प्रश्न क्यों करेगा ?

दरअसल शादीशुदा से यह प्रश्न करने का अर्थ ही समझ नहीं आता। क्योंकि यदि वह कहे कि ”नहीं करनी चाहिये“ तो यह उसका अनुभव है, और कहे कि ”करनी चाहिए“ तो यह भी उसका निजी अनुभव है.... आपके बारे में भविष्यवाणी कैसे की जा सकती है। आप किसी संबंध को शारीरिक, मानसिक रूप से कैसे निभाते है.. नहीं निभाते हैं यह आप पर निर्भर है ना कि किसी शादीशुदा पर। निजी जीवित संबंधों का सामान्यीकरण कैसे किया जा सकता है?

लेकिन इसके उत्तर के बारे में सोचते हुए याद आया कि - कहीं पढ़ा था ...
आप जिससे प्यार करते हो उससे शादी मत करो .... शादी उससे करो जो आपसे प्यार करता है।
ये वाक्य सरलता से समझ नहीं आता, पर जिन्दगी के सच ऐसे ही होते हैं।
पर मेरा मानना है शादी जीवन का वो सच है जिसके लिए दिल से नहीं दिमाग से फैसला करना चाहिए /
 शादी  जीवन  का   बहुत  बड़ा  फैसला  है ,ये  दो  इंसानों  को  ही  नहीं  उनके  परिवार  को  भी  जोड़ता  है . शादी  के  बाद बहुत  से  प्यारे  बंधन  हमे  मिलते  है  जिनको  आपसी  प्यार  और  समझ से  शादी  में  बंधे  दोनों  बन्दों  को  निभाना  होता  है .अगर  दोनों  में  प्यार  विशबास  और  समझ  है  तो  वो  हर प्रॉब्लम  को  आसानी से  हल  कर  लेंगे ,दोनों  के  दिल  में  अपने  बड़ो  के  लिए  सम्मान  होना  चहिये इसलिए  जीवन  का  ये  फैसला  सिर्फ  प्यार  पर  नहीं  इन्सान  की  परख  कर  करना  चहिये  .
             
 शादी  उससे  करो  जो  आपके  परिवार  को  इज्ज़त  प्यार  दे   जो  शादी  के  इस   पवित्र  बंधन  को  प्यार  दे ,जो  आपके  सुख  दुःख  में  हमेशा  आपका  साथ  दे ,जो  एक  नए  रिश्ते  को  सचाई  और  विशबास  के  साथ  आगे  बडाये , जो  आपके  अच्छे   सही  निर्णय  में  आपको प्रोत्साहित करे  पर  जब  आप  गलत  हो  तो  आपको  प्यार  और  सख्ती  के  साथ  सही  रास्ता  दिखाए  आपको  आपकी  गलती के  लिए  टोके  नाकि  आपकी  चापलूसी  करे .क्योकि  जहा   ऐसा  हुआ  वही   घर  के  और  लोगो  का  सम्मान  दाव पर  लग  जाता  है .शादी  का  मतलब  प्रेमी  पाना  नहीं  है ,शादी  का  मतलब  हमसफ़र , जीवनसाथी , वो  दोस्त  पाना  है  जो  आपको  समझे  और  आपके  कंधे  से  कन्धा  मिला  कर  साथ  चले .जो हर अच्छी बुरे वक्त हमारे साथ हो और एक मार्गदर्शक ,प्रेमी ,हमसफ़र का सच्चे दिल से फ़र्जे निभाए जिसके साथ हम खुद के सफल भबिष्य का सपना सजाये और उसको कर्यबंत भी करे /