शनिवार, 11 अगस्त 2012

आशा है नव पीडी देश की फिर इतिहास बनाएगी ,भारत माँ के चेहरे से सारे दुःख मिटाएगी


देख  रही   थी  में  कब से  हस्ते  गाते  खिलोनो  को ,
बैसाखी  के  मेलों  को  और  हुलियारे  गलियारों  को ,
मुझे  सुनाई  थी  गाथा   दादी  ने  वीर  प्रताप  की
मुझे  सुनाई  थी  लोरी  नानी  ने  शिव  महान की
कभी   सुना  था  सोने  की  चिड़िया  भारत  देश कहलाता  था
जगदगुरु  का  दर्जा  हिंदुस्तान  ही  सबसे पहले  पाता  था
लेकिन  मेरे  भारत  पे  कैसी  अन्धयारी  छाई  हे
सोने  की  चेडिया  के  घर  में  कंगाली  क्यूँ  आई  हे
हम सब को भारत  की  वो  सोती  तकदीर  जगानी  है
  हमको भारत  के  शाख  शाख  पर फिर खुशियाली  लानी है 

निकलेंगे  हम  फेर से  कृष्ण  को   मुरली  याद दिलाने  को
निकलेंगे हम  राम  को  फिर  शबरी के  झूठे  बेर  खिलाने  को
निकलेंगे हम  महादेव  से फिर भ्रस्टाचार रूपी विष पान कराने  को
 निकलेंगे हम  सब मिल के  गंगा  को  फिर  से  धरती  पर भ्रस्टाचारइयो को मुक्ति  दिलवाने को
में  निकली  हूँ  देश  के  हर बच्चे  को अपना  भारत  का सम्मान याद दिलाने  को
शावक  के  दांतों  को  गिनने  की  वो  प्रथा  बताने  को
में  निकली  हूँ बंज़र  भूमि  में  फिर  फूल   खिलाने  को

भगत  सिंह  अशफाक  का  तुमको  जीवन  याद   दिलाने  को
हर  माता  को  पन्ना  का  फेर वो  त्याग याद दिलाने को .
कुरुक्षेत्र  का  धरमयुद्ध  अब  उनको  याद  नहीं  आता
अर्जुन  का  गांडीव  कृष्ण  का  गीता  ज्ञान  नहीं  आता
याद  नहीं  आते  उनको  दशरथ  के  बेटा  राम  की
दुराचारियों  के  जीवन  पर  वो  ही  पूर्ण  विराम  की
राम  वाही  थे  जिसने  रावन   को  लंका  में  मारा  था
पत्थर  बनी  अहिल्या  को  छूकर  इस  जग  से  तारा  था
अपने  अंतर्मन  में  झांको  राम  वाही  मिल  जायेंगे 
जिनके  ह्रदय  कलुषित  हो  वो  राम  कहा से  पाएंगे
राम  बसे  हैं  कण  कण  में  तुमको  बतलाने  निकली  हूँ
रावन रूपी बुरइयो से भारत बचने निकली हूँ

आशा है नव पीडी देश की फिर इतिहास बनाएगी
भारत माँ के चेहरे से सारे दुःख मिटाएगी
भ्रष्टाचार रूपी राक्षस से सोने की चिड़िया के पंख फिर वापस दिलवाएगी /

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