आप ही है जो अपनी जीवन रूपी गाड़ी को सही पथ पर चला सकते है कभी प्यार से तो कभी सख्ती से
रिश्तों के मायने बदल जाते हैं,
नए दायरों में जब बंध जाते हैं.
खो जाती है अंतरंगता कहीं दूर
तेवर बदले बदले नज़र आते हैं.
साथ ही पले ,बड़े होते हैं सब
सुख दुःख में रोते हँसते जब
क्यों दूरियां बढा लेते हैं इतनी
कि अपने दुश्मन बन जाते हैं.
जिस खून से रिश्ता जुड़ा,प्यासे
उसी के जाने कैसे बन जाते हैं.
वार्थ के चश्मे से उजला नहीं
बस केवल स्याह ही देख पाते हैं.
धन यश सब कुछ पा लेते हैं ,
बस अपनेपन को ठुकराते हैं,
रिश्ते अनमोल होते हैं जग में ,
उनका मोल नहीं जान पाते हैं.
आओ मिटा देते हैं कटुता सभी ,
मिठास से रिश्तों को सजाते हैं
दीवारें घृणा की नहीं आओ ,
रिश्तों का उपवन महकाते हैं.
कि अपने दुश्मन बन जाते हैं.
जिस खून से रिश्ता जुड़ा,प्यासे
उसी के जाने कैसे बन जाते हैं.
वार्थ के चश्मे से उजला नहीं
बस केवल स्याह ही देख पाते हैं.
धन यश सब कुछ पा लेते हैं ,
बस अपनेपन को ठुकराते हैं,
रिश्ते अनमोल होते हैं जग में ,
उनका मोल नहीं जान पाते हैं.
आओ मिटा देते हैं कटुता सभी ,
मिठास से रिश्तों को सजाते हैं
दीवारें घृणा की नहीं आओ ,
रिश्तों का उपवन महकाते हैं.
क्या हो गया है बच्चो को जीन माँ पापा ने उन्हे इतनी प्यार और लाड से बड़ा
किया आज अपने माँ बाप की सेवा भी नहीं कर पा रहे है उनके साथ कठोर और गलत
व्यबहार करते हुए उन्हें शर्म और भगवान का डर भी महसूस नहीं होता ऐसे
बड़ो को देख दिल से अपने बड़ो के लिए आदर नहीं शर्मिंदगी महसूस करते है हम
बच्चे , कल में अपनी एक आंटी के घर किसी कम से गई वाह एक अनजान औरत से
मिलना हुआ वो मेरे मम्मी की उम्र से भी थोड़ी बड़ी थी बेचारी विधवा थी उनसे
बात करते हुए महेसूस हुआ मुझे की पति खोने के बाद बच्चो ने उन्हे एक नौकर
बना दिया है क्योकि वो कहने लगी अब नहीं रुकुगी मुझे खाना बनाना है नहीं तो
बहु datagi वो इन्तिज़ार कर रही होगी मेरा मैने आंटी से पुछा क्या इनकी
बहु खाना नहीं बना सकती आंटी ने बताया वो कुछ नहीं करती सारा घर का कम यही
करती है ये सुन मेरी नजरो में उस औरत के लिए दया और सम्मान बड़ गया और दिल
में उस बहु के लिए क्रोध और शर्म आई की कैसी औरत है मेरे से उम्र में थोड़ी
बड़ी है आराम से काम कर सकती है लेकिन माँ के साथ ऐसा व्यबहार कर खुद के
करम ख़राब कर रही है उनके खुद के बच्चे जब अपनी दादी के साथ माँ का
व्यबहार देखते होंगे तो क्या शिक्षा लेते होगे आज जो उनकी माँ अपनी सास के
साथ कर रही है कल बच्चे उनके साथ वही करेगे क्योकि उन्होंने ही तो अपने
बच्चो को ये सिखाया है/
मैं इसके
लिए बहु से ज्यादा दोषी उस बेटा को मानती हूँ जो अपनी माँ को अपनी बीबी से
सम्मान भी नहीं दिलवा पा रहा ऐसे बेटा पाने से तो बेटी होना ज्यादा अच्छा
है क्योकि आप हमेशा समाज में अपने आस पास देख लीजिये एक बेटी अपने पति से
अपनी माँ पापा को सम्मान दिलवाती है ये ८०% घरो में देखने को मिल जायेगा
लड़के खुद गलत है जो घर में कलेश न हो इस डर से उनके बड़ो के साथ होता गलत
व्यबहार देख चुप रहते है पतनी का प्यार और सम्मान पर हक है और वो देना भी
चाहिए पर अगर वो गलत है और आपके बड़ो के साथ गलत करती है तो आपको विरोध
करना चाहिए क्योकि आप ही है जो अपनी जीवन रूपी गाड़ी को सही पथ पर चला सकते
है कभी प्यार से तो कभी सख्ती से/
मैं अपने साथ की
लडकियों से और उन औरतो से पूछना चाहूंगी की सास और मम्मी में अंतर क्यों
अगर हम दोनों जीवन साथी शादी के बाद एक दुसरे के मम्मी पापा को दिल से अपने
पापा मम्मी समझ ले तो उनके तकलीफ का दर्द हमे उतना ही होगा जितना अपने
parents का और फेर हमारे घर में कभी कोई बड़ा अपमानित नहीं होगा और बड़ो
के प्यार और आशीर्वाद के तले हमारा परिवार खूब सुखी रहेगा आशा है अब आप सब
भी अपने आस पास ऐसे लोगो को समझा सके शायद किसी बड़े के चेहरे पर आपकी बजह
से मुस्कान लौटे तो उनका आशीर्वाद बड़ा हाथ आपके सर पर भी बड़े /
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