बुधवार, 22 अगस्त 2012

भारत की संस्कृति पर भी पश्चमी सभ्यता का रंग चड गया

   
 में एक कवियत्री एक राज कहती हूँ
अपने दिल की बात और एहसास कहती हूँ
समय का चक्र बहुत आगे बड़ गया है
भारत की संस्कृति पर भी पश्चमी सभ्यता का रंग चड गया है
जहाँ पूजते थे बच्चे माँ बाप को भगवान की तरह
कई बार रखते है बुडापे में एहसान की तरह
भूल जाते है ये बुढ़ापा एक दिन उनको भी आयेगा
आज जो उन्होंने किया है कल वही तो उनका बेटा धोरायेगा

में एक कवियत्री एक राज कहती हूँ
अपने दिल की बात और एहसास कहती हूँ
कभी लडकियों के लिए शर्म हया उनका गहना थी
शर्म हया किस चिड़िया का नाम आज की लडकिया ये कहती है
विचारो से मोर्डन हो या नहीं पर कपड़ो से जरूर मोर्डन होती है
करियर की प्लानिंग करे या न करे
पर डेटिंग की प्लानिंग पुरे दिल से करती है

में एक कवियत्री एक राज कहती हूँ
अपने दिल की बात और एहसास कहती हूँ
कभी शादी सात जन्मो का बंधन था
प्यार और जज्बात की डोरे से जुड़ा एक प्यारा संगम था
आज शादी व्यापर बन गया तलाक मुक्ति पाने का हतियार बन गया
लिविंग relation ने अपना घर भारत में भी बना लिया है
लड़के लडकियों ने इन्टरनेट पर झूठे प्यार का घरोंदा सजा लिया है
क्या कहे अब भारत ने मोर्डेन होने की दोड में भी अपना परचम लहरा लिया है

सच है समय का चक्र बहुत आगे बड़ गया है
नई पीडी पर नए सभ्यता का रंग चड गया है
काश कोई समय के चक्र को सही मार्ग पर ला दे
नई सभ्यता में पुरानी सभ्यता का रंग मिला दे
फिर एक खुशहाल भारत होगा,
संस्कृतियों के रंग से रंगा सुंदर असमान होगा
फिर संस्कारो से भरी सुनहरी चिड़िया अपने पंख फैलाएगी
भारत की सुन्दरता का परचम फिर हर देश में लहराएगी

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