गुरुवार, 9 अगस्त 2012

कान्हा का चरित्र एक आदर्श

श्री कृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष में आज कान्हा के चरित्र से जो मैने समझा और सीखा आप सब के समक्ष कहना चाहूंगी/ श्री कृष्ण ने अपनी लीलाओ के माध्यम से समाज में स्त्री और पुरुष के बीच रिश्तो की कुछ नये व सर्वथा शब्द्पूर्ण परिभाषाये सामने रखी यही नहीं द्रोपदी का प्रसंग हो या गोपियों का मान रखने की बात हो तो कृष्ण ने हर महिला से अपने रिश्ते का मान रखा और समाज को एक मिसाल दी ,हमे देश सुधार लाने का मार्गदर्शन भी कान्हा के चरित्र से सीखने को मिलता है:-
स्त्री को स्बलम्बी और समाज में समानित स्थान दिलाया :-

वे स्त्री का सम्मान करते थे उन्होंने स्त्री को स्बलम्बी बनने का अधिकार दिया और स्त्री को भी सक्षम व्यक्तित्व के तौर पर साबित करते चलते गए उद्धरण के तौर पर उन्होंने अपने हर कार्य में अपनी पत्नी को अपना सलहाकार माना तभी तो जब वासुदेव की दरिदता दूर करनी थी तो उन्होंने लक्ष्मी जी को वासुदेव के घर की कायापलट करने भेजा /
जरसंध को पराजीत करजब उसके बंदिग्रहा से राजकुमारियो को मुक्त कराया गया तो उन बेकसूरों के समक्ष सामाजिक बहिष्कार का सबसे बड़ा खतरा था कान्हा ने उनको vibha बंधन में बांध कर समाज में स्थान दिलाया साथ ही इस तथ्य की नीव रखी की स्त्री की पवित्रता उसके शारीर या उसकी स्थतियो से जोड़कर नहीं देखी जानी चाहिए बल्कि जो बेक़सूर स्त्री है उनको अगर मौका मिलता है समाज में सर उठा कर जीने का तो प्रोत्साहित करना चाहिए /

कन्या हत्या के विरोधी थे कान्हा :-

राजा कंस द्वारा ७ कन्याओ को निर्मम हत्या के बाद जब कृष्ण का जन्म हुआ उनका ये अवतार ७ नवजात कन्याओ के हत्यारे ,अनाचारी कंस के लिए था /कन्याओ की हत्या कंस के वध का प्रमुख कारण बनी /इस नाते कृष्ण ने समाज को कन्या हत्या एक जघन्य अपराध बताया और बताया की ऐसे अपराधी को मृतुदंड से कम का भागी नहीं माना जाना चाहिए समाज मृतुदंड नहीं दे सकता तो ऐसे लोगो का बहिष्कार कर उनको सख्त सजा तो दे सकता है /

लड़का एवं लड़की अच्छे दोस्त भी होते है उनकी दोस्ती में निस्वार्थ प्रेम भी हो सकता है इसलिए समाज की गन्दी सोच को कान्हा की इस लीला ने बदला :-

कृष्ण का प्रेम योगी का प्रेम था / उन्होंने महिला और पुरुष के बीच दोस्ती का एक नया रिश्ता स्थापित किया जो हमे शिक्षा देता है की पुरुष और स्त्री की दोस्ती को गलत नज़र से देखना हमारी छोटी और गन्दी सोच को दर्शाता है हमे लोगो को सुधारने की नहीं खुद को सुधारने की जरूरत है/
पांडव पत्नी द्रोपदी के अत्यंत प्रिय सखा थे कान्हा जो द्रोपदी के हर संकटकाल में सच्चे दोस्त की तरह उनके साथ खड़े रहे चाहे वो चीरहरण की बात हो या द्रोपदी को उनका सम्मान वापस दिलाने की बात हो /
                  इसलिए मेरा मानना है की कृष्ण एक ऐसे देव है जिनके चरित्र से हमे आज के समाज में फैली दुर्भावनाओ और करुतियो में सुधार की सही दिशा मिलती है /

1 टिप्पणी:

  1. आपको और आपके पूरे परिवार को जन्माष्टमी की हार्दिक हार्दिक शुभकामनायें....

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