राजनीति करना कोई बुरी बात नहीं है और न केवल एक परिवार बिशेष के लिए
आरक्षित काम है लेकिन आज तक जिनको बुरा कहते आये हैं उनके जैसा ही बन जाना
भी ठीक नहीं है . राजनीति करने के लिए आपको हर वो कार्य भी करना पडेगा
जिनको बुरा कहते हैं. चुनाव जीतने के लिए सभी हथकंडे अपनाने होंगे.
आपको चुनाव के लिए, हर गलत -सही तरीके से फंड भी जुटाने होंगे , जाति-वाद भी देखना होगा
,
सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और मीडिया के लोगों का भी तुष्टीकरण करना
होगा . बहुत सारी गलत बातों को भी नजर अंदाज करना होगा जिन आज आप खुलकर बोल
सकते हैं .
बैसे अगर अच्छे लोग राजनीति में आयें और जैसा कह रहे हैं बैसा ही करे , तो देश के लिए बहुत अच्छी बात होगी. अभी ऐसा लग रहा है कि - अन्ना की नई पार्टी में केवल अच्छे लोग ही होंगे लेकिन पार्टी बनने के बाद यहाँ भी कुछ ही दिन में भ्रष्ट लोगों का कब्जा हो जाएगा.
अनपढ़ नेताओं से तंग आकर जनता ने पढ़े लिखे नेताओं से भी बहुत उम्मीद की थी लेकिन क्या हुआ ? मनमोहन सिंह, चिदम्बरम, कपिल सिब्बल, अजीत सिंह, आदि ने पढ़े-लिखे लोगों से जनता की उम्मीद को कैसे तोडा है ये सबको पता ही है/
अब तो बस आस ही रख सकते है हम की अन्ना की पार्टी जो कह रही है वो करके दिखाएगी , और सुना भी है हमने आस पर दुनिया कायम है अब सारी डोरे ऊपर वाले के हाथ हम और अन्ना दोनों कठपुतली है जिसकी डोरे देश के आने वाले waqut के हाथ है जहा अन्ना भारत रूपी मंच पर खेलने वाले कलाकार है और हम वो दर्शक जो टिकिट (वोट)देकर तमाशा देखने आये है की happy ending होगी सब घोटाले और कालाबाजारी ख़तम होकर या अन्ना की टीम भी इस घोटाले और फरेब में लिप्त होकर sad ending दिखायेगे इस मंच पर/
बैसे अगर अच्छे लोग राजनीति में आयें और जैसा कह रहे हैं बैसा ही करे , तो देश के लिए बहुत अच्छी बात होगी. अभी ऐसा लग रहा है कि - अन्ना की नई पार्टी में केवल अच्छे लोग ही होंगे लेकिन पार्टी बनने के बाद यहाँ भी कुछ ही दिन में भ्रष्ट लोगों का कब्जा हो जाएगा.
अनपढ़ नेताओं से तंग आकर जनता ने पढ़े लिखे नेताओं से भी बहुत उम्मीद की थी लेकिन क्या हुआ ? मनमोहन सिंह, चिदम्बरम, कपिल सिब्बल, अजीत सिंह, आदि ने पढ़े-लिखे लोगों से जनता की उम्मीद को कैसे तोडा है ये सबको पता ही है/
अब तो बस आस ही रख सकते है हम की अन्ना की पार्टी जो कह रही है वो करके दिखाएगी , और सुना भी है हमने आस पर दुनिया कायम है अब सारी डोरे ऊपर वाले के हाथ हम और अन्ना दोनों कठपुतली है जिसकी डोरे देश के आने वाले waqut के हाथ है जहा अन्ना भारत रूपी मंच पर खेलने वाले कलाकार है और हम वो दर्शक जो टिकिट (वोट)देकर तमाशा देखने आये है की happy ending होगी सब घोटाले और कालाबाजारी ख़तम होकर या अन्ना की टीम भी इस घोटाले और फरेब में लिप्त होकर sad ending दिखायेगे इस मंच पर/
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