आजकल के समय में एक नया जागरूक समाज नज़र आरहा है सब लोग अपना भविष्य सुन्दर
और सजग बनाने की राह में बढ़ रहे हैं! लेकिन इन सामाजिक जग्रतियों के मध्य
एक अजीब सी नवीन परंपरा जाग उठी है जो समाज को ना जाने किस दिशा में लेकर
जायेगी यह समझ से परे है।
आजकल हर परिवार अपने घर में किसी न किसी पर कार्यरत बहु की कामना करता है
और हर लड़का इंजिनियर की डिग्री हाथ में आते ही घोषणा कर देता है की जीवन
संगिनी कोई इंजिनियर ही लड़की बनेगी! अर्थात जो लड़कियां कला माध्यम से पढ़ी
हैं और जो किसी कंपनी में कार्यरत नहीं हैं
वे उनकी योग्यता सूचि से बाहर हैं! तोह प्रश्न यह उठता है के उन लड़कियों
का क्या जिनको बिना जाने बिना समझे मात्र उनको एक नौकरी के अभाव में विवाह
की योग्यता सूचि से बाहर कर दिया जाता है! मेरी एक सखी है जो एक गुणवान
कन्या है और उच्च शिक्षित भी हैं लेकिन उसके पिता ने उसको नौकरी नहीं करने
दी! वो स्वयं भी आत्मविश्वासी है और किसी पर आश्रित नहीं है! लेकिन उसके
लिए सभी सुयोग्य वर, उससे बिना मिले ही निर्णय ले लेते हैं के ..वो योग्य
नहीं! क्युकी उसके पास इंजिनियर की डिग्री नहीं और नौकरी भी तोह नहीं!
मेरी किसी की मानसिकता से कोई शिकायत नहीं किन्तु मैं चिंतित हूँ यह सोचकर
की विवाह के पश्चात इन लडको और परिवारों में से अक्सर ज़्यादातर की पत्निया
अपनी नौकरी त्यागकर परिवार और बच्चो की जिंदगी बनाने में लग जाती हैं फिर
कहाँ जाता है इनका कार्यरत पत्नी का स्वपन.और अगर समाज में इसी प्रकार की
सोच बन गयी के अब हर इंसान की सफलता और गुणवत्ता का एक मात्र मात्रक है
उसकी नौकरी का होना! यदि नहीं तोह लड़की कितनी भी गुणवान हो किसी भी वजह के
चलते उसने नौकरी न करने का फैसला किया हो वह अवगुणी है!
और लड़की में कहीं कोई गुण नहीं बस एक इंजिनियर की डिग्री है और वह एक अछि नौकरी कर रही है तोह उसकी व उसके माता पिता की चिंता दूर है क्युकी वह सर्वगुण संपन्न है
अर्थात अब समाज में परिवार समर्पित लडकियों का कोई महत्व नहीं बचा....
न जाने समाज किस दिशा में जायेगा..
और लड़की में कहीं कोई गुण नहीं बस एक इंजिनियर की डिग्री है और वह एक अछि नौकरी कर रही है तोह उसकी व उसके माता पिता की चिंता दूर है क्युकी वह सर्वगुण संपन्न है
अर्थात अब समाज में परिवार समर्पित लडकियों का कोई महत्व नहीं बचा....
न जाने समाज किस दिशा में जायेगा..
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