याद आ रही है पुरानी वो बच्चपन की यादे
याद आ रही है पुरानी वो बच्चपन की यादे ,
वो बचपन के दिन ,वो नटखट सी बाते ,
वो पेड़ो पर चड़ना ,वो पउपा पकड़ना ,
वो तितली के पीछे भागते ही जाना
स्कूल में शेतानियो की नानी कहलाना
वो teacher का चट्रिंग बॉक्स बुलाना
याद आ रही है मीठी सी बातें ,
वो चमकीले दिन ,वो प्यारी सी बातें,
वो प्रिसिपल का हर शेतानी पर
सबसे पहले मुझे याद करना
वो मम्मी का कहना
आज मार कर ही खाना खाऊगी
वो पापा का मासूमियत से समझाना
की बेटा पिट लो मम्मी खाना खा लेगी
वो बच्चपन की बाते वो भैया से लड़ना
बहुत याद आता है बच्चपन वो अपना
याद आ गया वो चंचल सा बचपन,
वो छिपना छिपाना,वो मिल बाँट कर टिफिन का खाना ,
वो लड़ना झगड़ना और वो डर कर सहमना I
शेतानी करना और सीधे बन जाना
teacher का कहना मेरी आँखों के सामने ही रहना
वो पैरोडी बनाना ग्रुप में सुनना
कितना प्यारा था बचपन हमारा ,
काश लौट आये वो बीता जमाना
आज भी आती है मुस्कान सबको
जब याद आता है बच्चपन हमारा
वो बच्चपन हमारा वो बच्चपन हमारा

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