शनिवार, 8 सितंबर 2012

जीना सिखाया मुझको मेरी आंखो ने






          जीना सिखाया मुझको मेरी इन प्यारी आँखों ने 


इक रिश्ता बनाया इन आँखों ने

मुझे दिल तक पहुचाया इन आँखों ने

किसी को चाहना किसे कहते है
ये भी सिखलाया इन आँखों ने

है शर्म हया का गहना ये

पलकों से बताया आँखों ने

कुछ राज छुपाये आँखों ने

हमे प्यार सिखाया आँखों ने

मैं याद करूँ उन सपनों को जिन्हें दिल में बसाया आँखों ने

मैं याद करूँ उन सपनों को जिन्हें सच कर दिखाया इन आँखों ने

होंठ तो अब तक हिले न थे हाथ हाथ से मिले न थे

चुपके से सब समझाया इन आँखों ने

धड़कन के साज़ बस बजे ही थे

साँसों की लय संग रचे ही थे

प्यार का सुन्दर गीत बनाया इन आँखों ने

इन आँखों का अब क्या कहना बस
इनमे दिल के है राज बसे

जो है अनजान सभी जन से

इन आँखों में वो ख्वाब सजे जो पूरा करदे साईं अगर

जीवन मेरा हो जाये सफल बस इतना ही में कहती हूँ

जीना सिखाया मुझको मेरी इन प्यारी आँखों ने .




ankhe

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