शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

Mein Ek lekhika

में एक लेखिका जीवन के हर रंग से रंगती शब्दों का ये जाल ,
जज्बातों की माला को शब्दों में पिरोना है बस मेरा शौक,
मेरी हर माला में होता है जीवन का  कुछ राज,
कही  सुखो का सागर इसमें कही गम का एहेसास ,
कभी चेहरे पर लहलाती सी मुस्कान दे जाये,
कभी नयन की चंचलता दे मंद मंद मुस्काए
कभी शब्दों का लेखा कुछ गहराई से कह जाये
कभी बन सागर का पानी नैनो से बह जाये
में एक लेखिका जीवन के हर रंग से रंगती शब्दों का ये जाल ,
मेरे हर शब्दों में होता जीवन का एहेसास
कभी लिखु में चंचलता सी शोक परी की कहानी,
कभी लिखु में जूझते नवयुवको की रवानी
कभी नव शब्दों की माला में बुनती प्यार का रंग भी ऐसे
जैसे गागर भर डाली हो मधु रस से मैंने
कभी बिरहा की अग्नि में मैं युगल जोड़ी को रुलाऊ
कभी लक्ष्मी बन किसी का आंगन  पायल से खान्काऊ
में एक लेखिका जीवन के हर रंग से रंगती शब्दों का ये जाल ,
जज्बातों की माला को शब्दों में पिरोना है बस मेरा शौक,

 




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