सोमवार, 4 जून 2012

जीवन क्या है?

जीवन क्या है ...?
क्यों ?? क्यों ...कहता है जीवन क्या है ...?
कब तक तुझको ये बतलाऊ ....लाइफ हूँ  देखो ऐसी  हूँ ....!
       लोगो से परिचय दिलवाऊ फिर भी प्यार न तुझ से पाऊ ....!
       सोच अगर तू मुझ में जीता ,तेरी साँसे मुझ में बस्ती ........!
फिर तुझको में  न मानु ,तुझको अगर भुला देती हूँ ..........!
तेरा परिचय सबसे मांगू .....कौन है तू ....?आखिर है कौन तू ...........?
      आंसू कहता तुझको कोई ,दर्द भी कहता ,बोझ भी कहता 
      कभी दया करके तुझपे वो ,प्यार से कोई गीत सुनाता.....?
और चाहता तुझसे वो उस  गीत के संग थिरकना और फिर गुनगुनाना 
क्या ऐसा प्यार तुझे भाएगा ,क्या तू प्यार  फिर दे पायेगा ...???
              मेरी सांसे तुझमे बस्ती है ..तुम लोगो में जीती हूँ में .....!
              जब तक  तू जीती रहती है में भी जीवन कहलाती हूँ !!
             मुझे दुखी किया है तुने ...और उमीदे  भी  मुझ से है ...??
चाहा  नहीं मुझे जब तुने ,प्यार की आस में क्यों बैठा है ...?
प्यार दे में प्यार ही दूंगी ..खुशियों से दामन भर दूंगी ...
मत पूछ तू क्या जीवन है ...मेरा परिचय क्या है !
         क्यों ?? क्यों ...कहता है जीवन क्या है ...?
          कब तक तुझको ये बतलाऊ ....लाइफ हूँ  देखो ऐसी  हूँ ....!




           
               





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