नदियों जैसा समां गया रिश्तो का प्यार परछाई सा //
भगवान का वरदान है नारी ममता की शान है ,
जिसको दिया इश्बर ने माँ बानने का मान है /
फिर क्यों तुम घबराते हो बेटी को ठुकराते हो ,
प्यार दो विश्बास दो बेटी को भी मान दो /
अपने जीवन में बेटी को एक सफल पहचान दो ,
आज है नारी बनके उभरी शक्ति का प्रतीक है /
नारी के अस्तित्व से ही जीवन का स्वरुप है,
नारी है जीवन की नीव नारी मील का पत्थर है ,
हर मंजिल पर खुद को पहचान देती नारी इतनी सक्षम है//
अपने हाथो खुद के घर की नीव को न तुम हिलाओ /
नारी भूर्ण हत्या कर इसका अस्तित्व न अब मिटाओ ,
बेटी पा कर खुद को तुम अब गर्व का एहसास कराओ /
कन्या दान जैसे महादान से खुद को न वंचित करवाओ ,
माना बेटे घर के चिराग है पर बेटी तो दो घर की शान है ,
बेटी नहीं रहेगी तो फिर चिराग कहा से लाओगे /
प्रकृति के विनाश में तुम अनजाने ही योगदान कर जाओगे ,
इस समाज के विकराल रूप का कारण तुम ही कहलाओगे //

नारी का अस्तित्व है सागर की गहराई सा ,
जवाब देंहटाएंनदियों जैसा समां गया रिश्तो का प्यार परछाई सा //
Superb ........Superb
Thanuks for Appericiation.
हटाएं"aap yuhi protsahit kerte rahiye,mein yuhi kavita likh apse tarif sunti rahu bas sai humesha mera sath dete rahe"