रविवार, 3 जून 2012

नारी का अस्तित्व है

नारी  का  अस्तित्व  है  सागर की गहराई  सा 
 नदियों  जैसा समां गया रिश्तो का प्यार परछाई  सा //
भगवान का वरदान  है नारी ममता की शान है ,
जिसको दिया इश्बर  ने माँ बानने  का मान  है /
फिर क्यों तुम घबराते हो बेटी को ठुकराते हो ,
प्यार दो विश्बास दो बेटी को भी मान दो /
अपने जीवन में बेटी को एक सफल पहचान  दो ,
आज है नारी बनके उभरी  शक्ति का प्रतीक है /
नारी के अस्तित्व से ही जीवन का स्वरुप है,
नारी है जीवन की नीव नारी मील  का पत्थर है ,
हर मंजिल पर खुद को पहचान देती  नारी इतनी सक्षम है//
अपने हाथो खुद के घर की नीव को न तुम  हिलाओ /
नारी भूर्ण  हत्या कर  इसका अस्तित्व न अब मिटाओ ,
बेटी पा  कर  खुद को तुम अब गर्व का एहसास  कराओ /
 कन्या दान जैसे महादान से खुद को न वंचित करवाओ  ,
माना  बेटे  घर के चिराग है पर बेटी तो  दो घर की शान है ,
बेटी नहीं रहेगी तो फिर  चिराग कहा से लाओगे /
प्रकृति के विनाश में  तुम अनजाने ही योगदान कर  जाओगे ,
इस समाज के विकराल रूप का कारण  तुम ही  कहलाओगे //

2 टिप्‍पणियां:

  1. नारी का अस्तित्व है सागर की गहराई सा ,
    नदियों जैसा समां गया रिश्तो का प्यार परछाई सा //

    Superb ........Superb

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    उत्तर
    1. Thanuks for Appericiation.
      "aap yuhi protsahit kerte rahiye,mein yuhi kavita likh apse tarif sunti rahu bas sai humesha mera sath dete rahe"

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